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डूसू चुनाव को लेकर हाईकोर्ट का कड़ा रुख, कहा- हालात नहीं सुधरे तो चुनाव रद्द करने पर विचार

दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (डूसू) चुनाव प्रक्रिया में कथित गुंडागर्दी और अदालत के आदेशों के उल्लंघन को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि चुनाव प्रक्रिया के दौरान इस तरह का आचरण नहीं रुका और स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो चुनाव रद्द करने की अनुमति दी जा सकती है।

मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि इस तरह के आपराधिक व्यवहार, लापरवाही और गुंडागर्दी को बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। अदालत ने यह भी कहा कि ऐसी घटनाएं हर साल सामने आ रही हैं।

अदालत ने कहा- ‘अब बहुत हो चुका’

सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा कि यदि अधिकारियों की ओर से यह संतुष्ट नहीं किया गया कि इस तरह की घटनाएं दोबारा नहीं होंगी, तो अदालत चुनाव की अनुमति नहीं देगी। अदालत ने विश्वविद्यालय प्रशासन और संबंधित अधिकारियों से चुनाव प्रक्रिया में अनुशासन और अदालत के आदेशों का पालन सुनिश्चित करने को कहा।

दिल्ली विश्वविद्यालय की ओर से पेश अधिवक्ता मोहिंदर रूपल ने अदालत को बताया कि बुधवार को चुनाव प्रचार समाप्त हो गया था। हालांकि, पीठ ने कथित उल्लंघनों से जुड़ी तस्वीरों पर सवाल उठाते हुए कहा कि इनमें अदालत के आदेश का स्पष्ट उल्लंघन दिखाई देता है।

विश्वविद्यालय प्रशासन और कानून-व्यवस्था पर सवाल

हाईकोर्ट ने दिल्ली विश्वविद्यालय प्रशासन और कानून लागू करने वाली एजेंसियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए। पीठ ने पूछा कि क्या विश्वविद्यालय प्रशासन स्थिति और कानून-व्यवस्था पर नियंत्रण रखने में सक्षम है।

अदालत ने कहा कि यदि अधिकारी स्थिति को नियंत्रित नहीं कर सकते या अदालत के आदेशों का पालन सुनिश्चित नहीं कर सकते, तो उन्हें यह बात स्पष्ट रूप से बतानी चाहिए। अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने अदालत के रुख से सहमति जताते हुए कथित घटनाओं को निंदनीय बताया और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की बात कही।

उम्मीदवारों के नाम वाली कारों पर भी सवाल

सुनवाई के दौरान अदालत के सामने ऐसी तस्वीरें रखी गईं, जिनमें डूसू उम्मीदवारों के नाम और लेबल वाली कारें दिखाई दे रही थीं। इस पर पीठ ने सवाल किया कि उम्मीदवार इन वाहनों से होने वाले कथित प्रचार से खुद को कैसे अलग कर सकते हैं।

अदालत ने यह भी पूछा कि यदि कारों पर उम्मीदवारों के नाम और लेबल लगे हैं, तो उन्हें उम्मीदवार के समर्थन के बिना प्रचार कैसे माना जा सकता है। एएसजी ने जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिया और सभी छात्र संगठनों को नोटिस जारी करने का सुझाव दिया।

बिना नंबर प्लेट वाली कारों पर भी सवाल

अदालत ने चुनाव प्रक्रिया के दौरान इस्तेमाल किए जा रहे कुछ वाहनों की तस्वीरों का हवाला देते हुए कहा कि उन पर पंजीकरण नंबर प्लेट दिखाई नहीं दे रही थीं। पीठ ने अधिकारियों से पूछा कि यदि संबंधित लोगों ने अदालत के निर्देशों का उल्लंघन किया है, तो उनके खिलाफ क्या कार्रवाई की गई।

अदालत ने यह भी सवाल किया कि अधिकारियों का यह कहना कि इसमें शामिल लोग बाहरी हैं और उनकी पहचान नहीं हो पाई है, किस तरह पर्याप्त जवाब हो सकता है।

याचिकाकर्ता ने लगाए गंभीर आरोप

सुनवाई के दौरान एएसजी ने कहा कि अधिकारी शुक्रवार सुबह 10:30 बजे अदालत में पेश होकर यह बताएंगे कि इस वर्ष का चुनाव पिछले चुनावों की तुलना में 85-90 प्रतिशत बेहतर रहा है। उन्होंने कार्रवाई किए जाने का आश्वासन भी दिया।

वहीं, याचिकाकर्ता के वकील प्रशांत मनचंदा ने चुनाव प्रक्रिया के दौरान कथित तौर पर बंदूकें लहराए जाने सहित कई घटनाओं का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उन्हें छात्रों और शिक्षकों की ओर से ऐसी घटनाओं से संबंधित तस्वीरें और संदेश मिले हैं।

अदालत ने सुनवाई के दौरान एक घायल कानून के छात्र की पहचान को लेकर हुए विवाद पर भी सख्त टिप्पणी की और कहा कि यह कोई तमाशा नहीं है तथा संबंधित लोगों को ऐसी गतिविधियों में शामिल नहीं होना चाहिए।

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