देश के इंजीनियरिंग जॉब मार्केट में प्रतिभा और रोजगार के अवसरों के बीच असंतुलन देखने को मिल रहा है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, 0 से 3 साल के अनुभव वाले इंजीनियर कुल पेशेवर उम्मीदवारों का 45 फीसदी हैं, लेकिन इंजीनियरिंग से जुड़ी नौकरियों में उनकी हिस्सेदारी सिर्फ 28 फीसदी है। ऐसे में फ्रेशर्स के बीच एक पद के लिए प्रतिस्पर्धा बढ़ गई है।
एक नौकरी के लिए 9.5 फ्रेशर्स दावेदार
रिपोर्ट के अनुसार, 0 से 3 साल के अनुभव वाले इंजीनियरों के स्तर पर एक नौकरी के लिए औसतन 9.5 उम्मीदवार उपलब्ध हैं। वहीं, तीन साल से अधिक अनुभव वाले इंजीनियरों के लिए यह अनुपात घटकर करीब चार से पांच उम्मीदवार प्रति पद रह जाता है।
4 से 10 साल के अनुभव वाले इंजीनियर सक्रिय उम्मीदवारों के कुल पूल का 42 फीसदी हैं, जबकि इंजीनियरिंग नौकरियों में उनकी हिस्सेदारी 54 फीसदी है। 15 साल से अधिक अनुभव वाले उम्मीदवारों के मामले में उम्मीदवार-जॉब अनुपात 4.1 तक पहुंच जाता है।
6.68 लाख नौकरियों के मुकाबले 39.59 लाख उम्मीदवार
अगस्त 2026 के अनुमान के मुताबिक, देश में इंजीनियरिंग पृष्ठभूमि वाले उम्मीदवारों के लिए करीब 6.68 लाख नौकरियां उपलब्ध थीं। इनके मुकाबले 39.59 लाख सक्रिय उम्मीदवार मौजूद थे। यानी प्रत्येक पद के लिए औसतन 5.9 उम्मीदवार प्रतिस्पर्धा कर रहे थे।
क्षेत्रवार देखें तो ऑटोमोबाइल में एक पद के लिए करीब 1.2 उम्मीदवार हैं, जबकि इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में यह संख्या बढ़कर 11.5 उम्मीदवार प्रति पद तक पहुंच जाती है।
टेक्नोलॉजी के अलावा भी रोजगार के अवसर
टेक्नोलॉजी सेक्टर इंजीनियरों के लिए सबसे बड़ा रोजगार केंद्र बना हुआ है, लेकिन इंजीनियरिंग से जुड़ी ज्यादातर नौकरियां अन्य क्षेत्रों में भी उपलब्ध हैं।
आईटी, सॉफ्टवेयर, सर्विसेज और ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCC) में कुल इंजीनियरिंग नौकरियों की करीब 33 फीसदी हिस्सेदारी है। वहीं, मैन्युफैक्चरिंग और इंडस्ट्रियल सेक्टर 15 फीसदी हिस्सेदारी के साथ दूसरे स्थान पर है।
कंस्ट्रक्शन, इंजीनियरिंग और रियल एस्टेट में करीब 13 फीसदी अवसर हैं। इसके अलावा इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, ऑटोमोटिव, ईवी, ऊर्जा और रिन्यूएबल एनर्जी जैसे क्षेत्रों में भी रोजगार के अवसर मौजूद हैं।
कंप्यूटर साइंस और आईटी सबसे बड़ा टैलेंट पूल
इंजीनियरिंग की अलग-अलग शाखाओं में कंप्यूटर साइंस और आईटी सबसे बड़ा टैलेंट पूल है। इस क्षेत्र में प्रति नौकरी करीब 5.8 उम्मीदवार उपलब्ध हैं।
वहीं, इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन/टेलीकॉम में एक अवसर के लिए 10.9 उम्मीदवार और इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंस्ट्रूमेंटेशन में 11.5 उम्मीदवार उपलब्ध हैं।
बंगलूरू सबसे बड़ा हायरिंग हब
शहरों के लिहाज से बंगलूरू इंजीनियरिंग भर्तियों का सबसे बड़ा केंद्र बना हुआ है। कुल इंजीनियरिंग अवसरों में इसकी हिस्सेदारी 19 फीसदी है, जो करीब 1.27 लाख नौकरियों के बराबर है।
दिल्ली-एनसीआर 13 फीसदी हिस्सेदारी के साथ दूसरे स्थान पर है। इसके बाद हैदराबाद में 12 फीसदी, पुणे में 10 फीसदी, चेन्नई में 9 फीसदी और मुंबई में 8 फीसदी इंजीनियरिंग नौकरियां उपलब्ध हैं।
उद्योग की जरूरत के अनुसार कौशल विकसित करना जरूरी
फाउंडिट के चीफ प्रोडक्ट ऑफिसर तरुण शर्मा के मुताबिक, इंजीनियरिंग करियर अब किसी एक सेक्टर या पारंपरिक रास्ते तक सीमित नहीं है। टेक्नोलॉजी, मैन्युफैक्चरिंग, इंफ्रास्ट्रक्चर, ऑटोमोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स और ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में इंजीनियरों के लिए अवसर मौजूद हैं।
रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि फ्रेशर्स के लिए केवल डिग्री के आधार पर रोजगार हासिल करना चुनौतीपूर्ण हो रहा है। ऐसे में उद्योग की बदलती जरूरतों के अनुरूप कौशल विकसित करना उनके लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।
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