गौतमबुद्धनगर में अप्रैल में हुए श्रमिक आंदोलन और हिंसा के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा आकृति चौधरी के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) यानी रासुका के तहत की गई कार्रवाई को अवैध करार देते हुए रद्द कर दिया है। हालांकि, NSA हटने के बाद भी आकृति की तत्काल रिहाई नहीं हो सकेगी।
आकृति के खिलाफ गौतमबुद्धनगर जिले के अलग-अलग थानों में 11 मुकदमे दर्ज हैं। इनमें से पांच मामलों में उन्हें जमानत मिल चुकी है, जबकि छह मामलों में निचली अदालत से अभी जमानत नहीं मिली है।
कोर्ट ने NSA की कार्रवाई पर उठाए सवाल
जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस अचल सचदेव की खंडपीठ ने आकृति की गिरफ्तारी के खिलाफ दायर याचिका पर दो सितंबर को फैसला सुनाया था। 15 पन्नों का फैसला सोमवार को जारी किया गया।
अदालत ने निवारक निरोध की प्रक्रिया को लेकर पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए NSA के तहत की गई कार्रवाई को रद्द कर दिया। कोर्ट ने अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी नाराजगी जताई और कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है। केवल कानून-व्यवस्था बिगड़ने की आशंका के आधार पर लोगों के अधिकार नहीं छीने जा सकते।
हिंसा के लिए उकसाने का सबूत नहीं मिला
कोर्ट ने NSA रद्द करते हुए कहा कि ऐसा कोई संदेश या वीडियो सामने नहीं है, जिससे यह साबित हो कि आकृति चौधरी ने लोगों को हिंसा, आगजनी या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के लिए उकसाया था।
अदालत ने गौतमबुद्धनगर के डीएम और अन्य अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर भी कड़ी टिप्पणी की। कोर्ट ने आकृति को पांच लाख रुपये का हर्जाना देने का आदेश दिया, जिसकी भरपाई अधिकारियों के वेतन से करने को कहा गया।
छह मामलों में जमानत मिलने तक जेल में रहेंगी
NSA की कार्रवाई रद्द होने के बावजूद आकृति के खिलाफ दर्ज आपराधिक मुकदमे खत्म नहीं हुए हैं। 11 में से पांच मामलों में उन्हें जमानत मिल चुकी है, जबकि छह मामलों में अभी जमानत नहीं मिली है। यही वजह है कि NSA हटने के बाद भी उन्हें तत्काल जेल से रिहाई नहीं मिल सकेगी।
आकृति के अधिवक्ता रजनीश यादव के अनुसार, उनकी जमानत के लिए जल्द ही हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल की जाएगी।
सात आरोपियों पर 11 एफआईआर
श्रमिक आंदोलन और 13 अप्रैल को हुई हिंसा के मामले में गिरफ्तार सात आरोपियों के खिलाफ गौतमबुद्धनगर में कुल 11 एफआईआर दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। इनमें पत्रकार सत्यम वर्मा, आकृति चौधरी, सॉफ्टवेयर इंजीनियर आदित्य आनंद, डीयू के छात्र हिमांशु ठाकुर, ऑटो चालक रूपेश रॉय, विधि छात्र योगेश मीणा, सृष्टि गुप्ता और फैक्टरी श्रमिक मनीषा चौहान के नाम शामिल हैं।
मामले में सृष्टि गुप्ता के अधिवक्ता और परिजनों की ओर से पुलिस पर फोन प्लांट करने सहित कई आरोप लगाए गए हैं। ये आरोप उनके पक्ष की ओर से लगाए गए हैं और मामले की जांच से जुड़े हैं।
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