Sunday , October 11 2026

Indian Stock Market: मजबूत कमाई के बाद भी FPI की बेरुखी, भारत से क्यों खिंच रहा विदेशी पैसा?

भारतीय शेयर बाजार में कंपनियों की कमाई में सुधार के बावजूद विदेशी निवेशकों का रुझान कमजोर हुआ है। बैंक ऑफ अमेरिका के अगस्त फंड मैनेजर सर्वे में भारत एशिया का सबसे कम पसंदीदा शेयर बाजार बन गया है। सर्वे में शामिल 98 फंड मैनेजरों में से 32 फीसदी ने भारतीय शेयरों में अपनी हिस्सेदारी कम रखने की बात कही।

कमाई बढ़ी, फिर भी निवेशक सतर्क

निफ्टी-50 कंपनियों की हालिया तिमाही आय में सालाना आधार पर करीब 18 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। इसके अलावा चालू तिमाही में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयरों में 4 अरब डॉलर से अधिक का निवेश किया है। इसके बावजूद बाजार के प्रदर्शन और ऊंचे वैल्यूएशन को लेकर निवेशकों की चिंता बनी हुई है।

भारत को लेकर विदेशी निवेशकों की बड़ी चिंताएं

बैंक ऑफ अमेरिका के सर्वे के मुताबिक भारतीय शेयर बाजार को लेकर निवेशकों की सबसे बड़ी चिंता आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी कंपनियों और अवसरों की कमी है। इसके बाद कमजोर आर्थिक वृद्धि, शेयरों का ऊंचा मूल्यांकन और सुधारों की धीमी गति प्रमुख चिंताओं में शामिल हैं।

निवेशकों का मानना है कि भारतीय कंपनियों की कमाई में सुधार के बावजूद शेयरों की कीमतें पहले से काफी ऊंचे स्तर पर हैं। ऐसे में भविष्य की वृद्धि को लेकर पर्याप्त भरोसा नहीं होने पर मौजूदा वैल्यूएशन निवेशकों को आकर्षित नहीं कर रहे हैं।

क्या विदेशी निवेशक भारत से पैसा निकाल रहे हैं?

भारत से विदेशी निवेशकों की पूरी तरह दूरी नहीं हुई है। चालू तिमाही में विदेशी निवेशकों ने 4 अरब डॉलर से ज्यादा भारतीय शेयर खरीदे हैं। हालांकि, यह निवेश बाजार में बढ़ती सतर्कता के बीच आया है। साल की पहली छमाही में भारतीय शेयरों से विदेशी पूंजी की रिकॉर्ड निकासी भी हुई थी।

बाजार के कमजोर प्रदर्शन ने बढ़ाई चिंता

निफ्टी-50 इस साल अब तक करीब 8 फीसदी नीचे है और प्रमुख एशियाई बाजारों में उसका प्रदर्शन कमजोर रहा है। हालांकि, मार्च के निचले स्तर से निफ्टी करीब 8 फीसदी उबर चुका है। बाजार में लगातार कमजोरी के कारण 10 साल से चली आ रही निफ्टी की सालाना बढ़त की परंपरा टूटने का खतरा भी बना हुआ है।

कच्चा तेल और वैश्विक तनाव भी दबाव की वजह

कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और अमेरिका-ईरान तनाव से जुड़ी अनिश्चितता भी भारतीय बाजार के लिए चिंता बढ़ा रही है। महंगे तेल से भारत के आयात बिल और महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है, जबकि वैश्विक बॉन्ड यील्ड और भू-राजनीतिक तनाव निवेशकों को जोखिम से दूर कर रहे हैं।

आगे क्या?

भारतीय बाजार के सामने अब सबसे बड़ी चुनौती कंपनियों की बढ़ती कमाई को ऊंचे वैल्यूएशन के साथ संतुलित करने की है। विदेशी निवेशकों का रुख इस बात पर निर्भर करेगा कि आर्थिक वृद्धि, सुधारों और वैश्विक तकनीकी रुझानों को लेकर भारत कितनी मजबूत संभावनाएं पेश करता है। फिलहाल विदेशी निवेशक भारत से पूरी तरह बाहर नहीं हुए हैं, लेकिन निवेश को लेकर उनका रुख पहले की तुलना में अधिक सतर्क दिखाई दे रहा है।

Check Also

अस्थिर रुपये को लेकर RBI गवर्नर की प्रतिक्रिया, बोले- मुद्रा फिलहाल कमजोर, स्थिरता के लिए हस्तक्षेप जारी

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बुधवार को रुपये में जारी कमजोरी ...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *