सावन माह में अमरोहा में चिकन और मटन की दुकानों को बंद कराने के लिए जारी नोटिस के खिलाफ दाखिल जनहित याचिका को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया। सुनवाई के दौरान अदालत ने याचिकाकर्ता की मंशा पर भी तल्ख टिप्पणी की।
हाईकोर्ट ने कहा कि याचिका ‘पब्लिक इंटरेस्ट’ के बजाय ‘पब्लिसिटी इंटरेस्ट’ में दाखिल की गई प्रतीत होती है। अदालत की इस टिप्पणी के साथ याचिका को खारिज कर दिया गया।
दुकानों को बंद कराने के नोटिस को दी गई थी चुनौती
याचिका में सावन माह के दौरान अमरोहा में चिकन और मटन की दुकानों को बंद कराने के लिए जारी नोटिस की वैधानिकता को चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ता अधिवक्ता नासिर फारूक की ओर से दलील दी गई कि कांवड़ यात्रा मार्ग से हटकर स्थित दुकानों को भी पुलिस ने नोटिस जारी कर बंद करा दिया।
याची की ओर से अदालत को बताया गया कि कार्रवाई से बड़ी संख्या में दुकानदारों और उनसे जुड़े लोगों की आजीविका प्रभावित हो रही है। याचिका में यह भी दावा किया गया कि नोटिस में केवल चार सोमवार को दुकानें बंद रखने का उल्लेख था, लेकिन प्रशासन की ओर से पूरे सावन माह में चिकन और मटन की दुकानें खोलने की अनुमति नहीं दी जा रही है।
गलियों और अन्य स्थानों की दुकानों का भी उठाया मुद्दा
याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि कांवड़ यात्रा मार्ग के अलावा गलियों और अन्य स्थानों पर स्थित मांस की दुकानों को भी बंद कराया गया। इसके अलावा कुछ दुकानदारों को बिना तारीख के नोटिस दिए जाने की बात भी याचिका में कही गई।
याची ने हाईकोर्ट से इन नोटिसों को रद्द करने और प्रशासन की कार्रवाई में हस्तक्षेप की मांग की थी। उसका कहना था कि दुकानों के बंद रहने से सैकड़ों लोगों के सामने रोजगार और आजीविका का संकट पैदा हो गया है।
सरकार ने किया याचिका का विरोध
उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता रामानंद पांडेय ने याचिका का विरोध किया। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने याचिका को खारिज कर दिया।
हाईकोर्ट की टिप्पणी के बाद अब अमरोहा में सावन के दौरान चिकन और मटन की दुकानों को बंद कराने से जुड़े प्रशासनिक आदेशों को चुनौती देने वाली यह याचिका न्यायिक स्तर पर खारिज हो गई है।
satyamorcha.com Hindi News, latest and breaking news in Hindi