उत्तराखंड के चमोली जिले के मायापुर-पीपलकोटी क्षेत्र में विष्णुगाड-पीपलकोटी जलविद्युत परियोजना की निर्माणाधीन सुरंग में पानी और मलबा घुसने से बड़ा हादसा हो गया। हादसे में सात मजदूरों की मौत हो गई, जबकि तीन लोग अब भी लापता हैं। रेस्क्यू ऑपरेशन लगातार जारी है।
सुरंग में अचानक घुसा पानी और मलबा
गुरुवार रात भूस्खलन और भूधंसाव के बाद सुरंग में अचानक भारी मात्रा में पानी और मलबा भर गया। हादसे के समय सुरंग के भीतर 22 मजदूर मौजूद थे। राहत एवं बचाव दल ने कई मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया, जबकि तीन लोगों की तलाश अभी जारी है।
गले तक पहुंचा पानी, रेस्क्यू में बढ़ी मुश्किल
रेस्क्यू टीमों के सामने सुरंग के भीतर बढ़ता पानी और जमा मलबा बड़ी चुनौती बना हुआ है। अधिकारियों के अनुसार, कुछ हिस्सों में पानी गले तक पहुंच रहा है। इसी वजह से बचाव अभियान बेहद सावधानी के साथ चलाया जा रहा है। अंडरवाटर कैमरे, डॉग स्क्वाड और भारी पंप मशीनों की मदद भी ली जा रही है।
दो दिन से गिर रहा था मलबा
हादसे के बाद परियोजना में श्रमिकों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं। जानकारी के अनुसार, जेसाल गांव के नीचे स्थित सुरंग में दो दिन से मलबा गिर रहा था, लेकिन परियोजना प्रबंधन ने इस पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया। करीब आठ महीने पहले भी इसी परियोजना की सुरंग में लोको ट्रॉलियों की टक्कर की घटना हुई थी।
सीएम धामी ने किया मुआवजे का एलान
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अस्पताल पहुंचकर घायल श्रमिकों से मुलाकात की और उनका हाल जाना। उन्होंने हादसे में जान गंवाने वाले मजदूरों के परिजनों को चार-चार लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की। मुख्यमंत्री ने रेस्क्यू अभियान में जुटी सभी एजेंसियों को तेजी से काम करने के निर्देश दिए हैं।
तीन लापता मजदूरों की तलाश जारी
लापता मजदूरों में लुकास टोपनो, चेतन पोयाम और देवनाथ शामिल हैं। एसडीआरएफ की छह टीमें समेत एनडीआरएफ, आईटीबीपी, पुलिस और अन्य विशेषज्ञ टीमें सुरंग के अंदर सर्च ऑपरेशन चला रही हैं। फिलहाल बचाव दल का पूरा ध्यान तीनों लापता मजदूरों तक पहुंचने पर है।
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