उत्तर प्रदेश में ग्राम प्रधानों का कार्यकाल खत्म होने के बाद प्रशासक के तौर पर काम कर रहे पूर्व प्रधानों को अब मानदेय नहीं मिलेगा। शासन ने स्पष्ट किया है कि प्रशासक के पद पर रहते हुए ग्राम प्रधान का मानदेय देने का कोई प्रावधान नहीं है।
प्रदेश में ग्राम प्रधानों का कार्यकाल मई 2026 में समाप्त हो चुका है। इसके बाद ग्राम पंचायतों के संचालन के लिए पूर्व प्रधानों को प्रशासक की जिम्मेदारी दी गई थी। हालांकि, प्रशासक बनने के साथ ही उन्हें निर्वाचित ग्राम प्रधान का दर्जा नहीं रह गया है।
प्रशासकों को नहीं मिल सकता प्रधान का मानदेय
शासन के सूत्रों के अनुसार, प्रशासकों को ग्राम प्रधान का दर्जा नहीं दिया जा सकता। ऐसे में उन्हें प्रधान के तौर पर मिलने वाला मानदेय भी नहीं दिया जा सकता। इसी वजह से मानदेय जारी रखने की पूर्व प्रधानों की मांग पूरी होने की फिलहाल कोई संभावना नहीं है।
उत्तर प्रदेश में कुल 58,213 ग्राम पंचायतें, 827 क्षेत्र पंचायतें और 75 जिला पंचायतें हैं। निर्वाचित ग्राम प्रधानों को प्रति माह 5,000 रुपये मानदेय दिए जाने का प्रावधान है।
ब्लॉक प्रमुख और जिला पंचायत अध्यक्ष को भी नहीं मिलेगा मानदेय
ग्राम प्रधानों के अलावा ब्लॉक प्रमुख और जिला पंचायत अध्यक्ष भी फिलहाल निर्वाचित प्रतिनिधि नहीं हैं। ब्लॉक प्रमुख को 11,300 रुपये और जिला पंचायत अध्यक्ष को 15,500 रुपये प्रति माह मानदेय मिलता है।
शासन के मुताबिक, जब निर्वाचित प्रतिनिधियों का कार्यकाल समाप्त हो जाता है और उनकी जगह प्रशासक नियुक्त किए जाते हैं, तो प्रशासक के रूप में उन्हें संबंधित पद का मानदेय देने का प्रावधान नहीं है।
इससे पहले भी जब पंचायतों में एडीओ पंचायत को प्रशासक बनाया गया था, तब उन्हें प्रशासक के रूप में कोई मानदेय नहीं दिया गया था। इसी व्यवस्था के आधार पर मौजूदा प्रशासकों को भी मानदेय देने से इनकार किया गया है।
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