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आरकॉम के खिलाफ ईडी की नई शिकायत से बढ़ी परेशानी, ₹40,185 करोड़ के मामले में जांच तेज

रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड (आरकॉम) से जुड़े करीब ₹40,185.55 करोड़ के धनशोधन मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने एक और बड़ा कदम उठाया है। जांच एजेंसी ने धनशोधन निवारण कानून (पीएमएलए) से जुड़े मामलों की विशेष अदालत में पूरक अभियोजन शिकायत दाखिल की है। यह 27 मार्च को दाखिल की गई पहली अभियोजन शिकायत की आगे की कड़ी है।

ईडी ने मामले में रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड, रिलायंस टेलीकॉम लिमिटेड समेत कई लोगों को आरोपी बनाया है। एजेंसी ने पीएमएलए की धारा 3 और 70 के तहत धनशोधन के आरोप लगाए हैं। हालांकि, मामले में लगाए गए आरोप जांच एजेंसी के दावे हैं और इन पर अदालत का अंतिम फैसला होना बाकी है।

रकम के इस्तेमाल को लेकर क्या आरोप

ईडी के मुताबिक, मामले में अपराध से अर्जित रकम का अनुमान ₹40,185.55 करोड़ है। एजेंसी का आरोप है कि कर्ज के तौर पर जुटाई गई रकम का इस्तेमाल निर्धारित उद्देश्य के बजाय पुराने घरेलू और विदेशी कर्ज चुकाने में किया गया।

जांच में आरोप लगाया गया है कि रकम को अलग-अलग समूह कंपनियों, मध्यस्थ संस्थाओं और बैंक खातों के जरिए कई बार इधर-उधर किया गया। इसके बाद इन पैसों का इस्तेमाल पुराने विदेशी वाणिज्यिक कर्ज और विदेशी मुद्रा परिवर्तनीय बॉन्ड की देनदारियां चुकाने में किए जाने का आरोप है।

ईडी का यह भी दावा है कि कुछ रकम को वैध कारोबारी खर्च और आय के तौर पर दिखाने की कोशिश की गई।

2007 से वित्तीय गड़बड़ी का दावा

जांच एजेंसी के अनुसार, कथित वित्तीय गड़बड़ी की शुरुआत कम से कम वर्ष 2007 में हुई थी। ईडी का कहना है कि इसके बाद भी आपस में जुड़ी वित्तीय गतिविधियां जारी रहीं।

जांच में आरकॉम, रिलायंस टेलीकॉम और रिलायंस इन्फ्राटेल द्वारा कथित तौर पर कर्ज और अन्य ऋण सुविधाएं गलत तरीके से हासिल करने तथा निर्धारित उद्देश्य से अलग उनका इस्तेमाल करने के आरोप सामने आए हैं।

एजेंसी के मुताबिक, कर्ज की रकम रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर और रिलायंस कैपिटल जैसी समूह कंपनियों में भी भेजी गई। कुछ रकम का इस्तेमाल विदेश में निजी संपत्तियां खरीदने और आरकॉम के मुनाफे को कथित तौर पर कृत्रिम रूप से बढ़ाने में किए जाने का भी आरोप है।

₹8,078 करोड़ की संपत्तियों पर ईडी की नजर

ईडी ने अदालत से करीब ₹8,078.06 करोड़ की संपत्तियों को जब्त करने की मांग की है। एजेंसी के मुताबिक, इन संपत्तियों को पहले ही कुर्क किया जा चुका है और निर्णायक प्राधिकरण ने कुर्की की पुष्टि भी कर दी है।

इन संपत्तियों में नई दिल्ली, नवी मुंबई, भुवनेश्वर, चेन्नई और पुणे में स्थित पट्टे पर ली गई तथा अन्य अचल संपत्तियां शामिल हैं।

दो आरोपी न्यायिक हिरासत में

मामले में गौतम भैलाल दोषी को 12 जून और सतीश सेठ को 9 जुलाई को गिरफ्तार किया गया था। दोनों फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं। धनशोधन मामलों की विशेष अदालत ने 15 जून को मुख्य अभियोजन शिकायत का संज्ञान लिया था।

सीबीआई की एफआईआर के आधार पर शुरू हुई जांच

ईडी ने इस मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की बैंकिंग प्रतिभूति और धोखाधड़ी शाखा, नई दिल्ली की ओर से दर्ज कई प्राथमिकी के आधार पर जांच शुरू की थी। ये प्राथमिकी बैंकों और वित्तीय संस्थानों की शिकायतों के आधार पर दर्ज की गई थीं।

ईडी के अनुसार, जांच में कर्ज और अन्य ऋण सुविधाएं कथित तौर पर धोखे से हासिल करने, रकम को दूसरी जगह लगाने और कई आपस में जुड़ी वित्तीय लेनदेन की पड़ताल की गई है। एजेंसी ने कहा है कि मामले में आगे की जांच अभी जारी है।

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