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रूस-नाटो टकराव का खतरा बढ़ा! पुतिन के आक्रामक रुख पर अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की नजर

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के रुख में बदलाव को लेकर अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने चिंता जताई है। रिपोर्ट के मुताबिक, मॉस्को ऐसे कदम उठा सकता है, जिनका असर नाटो के सदस्य देशों तक पहुंच सकता है। इनमें साइबर हमले और हाइब्रिड अभियान जैसे कदम शामिल हो सकते हैं।

नाटो देशों को निशाना बनाने की आशंका

अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, रूस की संभावित कार्रवाइयां बड़े पैमाने के पारंपरिक सैन्य अभियान से अलग हो सकती हैं। इनमें ऐसे ऑपरेशन शामिल हो सकते हैं, जिनमें रूस की सीधी भूमिका साबित करना मुश्किल हो। अधिकारियों का कहना है कि कुछ महीने पहले की तुलना में पुतिन अब जोखिम उठाने के लिए अधिक तैयार नजर आ रहे हैं।

क्या है रूस का मकसद?

अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि रूस का उद्देश्य फिलहाल सीधे तौर पर बड़ा युद्ध शुरू करना नहीं हो सकता। इसके बजाय मॉस्को नाटो की एकता और पश्चिमी देशों की प्रतिक्रिया को परखना चाहता है। खास तौर पर यह देखने की कोशिश हो सकती है कि नाटो के किसी सदस्य देश के खिलाफ कार्रवाई होने पर ट्रंप प्रशासन किस तरह प्रतिक्रिया देता है।

पश्चिमी देशों पर पुतिन के आरोप

पिछले महीने की शुरुआत में पुतिन ने पश्चिमी देशों पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि पश्चिम अपने हितों के मुताबिक संयुक्त राष्ट्र चार्टर और आत्मनिर्णय के सिद्धांतों की व्याख्या करता है।

पुतिन ने पश्चिमी प्रतिबंधों को भी निशाने पर लिया। उनका दावा था कि 2022 से रूस के खिलाफ लगाए गए प्रतिबंध अपने उद्देश्यों को हासिल करने में सफल नहीं हुए हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि रूस को युद्ध के मैदान में हराने में नाकाम रहने के बाद उसके विरोधियों ने रूस के खिलाफ आतंकवादी तरीकों का सहारा लिया।

रूसी राष्ट्रपति ने दोहराया कि रूस यूक्रेन में अपने घोषित लक्ष्यों को हासिल करेगा। उन्होंने पश्चिम पर रूस को कमजोर करने के लिए अभियान चलाने का आरोप भी लगाया।

नाटो ने भी रूस को बताया बड़ा खतरा

वहीं, नाटो महासचिव मार्क रुटे पहले ही रूस से पैदा होने वाले खतरे को लेकर चिंता जता चुके हैं। उन्होंने कहा था कि यूरोप और उत्तरी अमेरिका को रूस से तत्काल और कई स्तरों पर सुरक्षा चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

ऐसे में अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की ताजा चेतावनी ने रूस और नाटो के बीच बढ़ते तनाव को लेकर चिंताएं और बढ़ा दी हैं। हालांकि, फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि मॉस्को नाटो के किसी सदस्य देश के खिलाफ किस तरह का कदम उठा सकता है।

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