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पूर्व गृह मंत्रालय अधिकारी का सनसनीखेज खुलासा, अख्तर-आसिफ पर ड्रग्स तस्करी के आरोप; वूल्मर केस का भी जिक्र

नई दिल्ली। केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) के पूर्व अंडर सेक्रेटरी आरवीएस मणि के एक बयान ने भारत-पाकिस्तान क्रिकेट से जुड़े पुराने विवादों को फिर सुर्खियों में ला दिया है। एक पॉडकास्ट में उन्होंने दावा किया कि भारत दौरे पर आने वाली पाकिस्तान क्रिकेट टीम और उसके प्रतिनिधिमंडल के कुछ सदस्य कथित तौर पर ड्रग्स तस्करी में शामिल थे। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस पूरे नेटवर्क के पीछे पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई की भूमिका हो सकती थी। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।

शोएब अख्तर और मोहम्मद आसिफ का लिया नाम

आरवीएस मणि ने दावा किया कि पूर्व पाकिस्तानी क्रिकेटर शोएब अख्तर और मोहम्मद आसिफ ने कथित तौर पर पाकिस्तानी उच्चायुक्त के सामने भारत में ड्रग्स लाने की बात स्वीकार की थी। उन्होंने कहा कि यह मामला केवल व्यक्तिगत इस्तेमाल तक सीमित नहीं था, बल्कि भारत आने वाले कुछ पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडलों के जरिए ड्रग्स तस्करी किए जाने की आशंका पर उस समय चर्चा होती थी।

गौरतलब है कि अक्टूबर 2006 में पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) ने डोपिंग टेस्ट में प्रतिबंधित पदार्थ नैंड्रोलोन पाए जाने के बाद शोएब अख्तर और मोहम्मद आसिफ को भारत दौरे से वापस बुला लिया था। बाद में दोनों खिलाड़ियों पर लगा प्रतिबंध एक ट्रिब्यूनल ने हटा दिया था।

बॉब वूल्मर की मौत का भी किया जिक्र

पूर्व अधिकारी ने पाकिस्तान के पूर्व मुख्य कोच बॉब वूल्मर की वर्ष 2007 में हुई संदिग्ध मौत का भी उल्लेख किया। उन्होंने दावा किया कि वूल्मर कथित तौर पर ड्रग्स तस्करी का विरोध कर रहे थे और उनकी मौत को भी उसी संदर्भ में देखा जाना चाहिए।

हालांकि, यह उल्लेखनीय है कि बॉब वूल्मर की मौत की जांच कई अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों द्वारा की गई थी और अब तक किसी आधिकारिक जांच में इन दावों की पुष्टि नहीं हुई है। उनकी मौत आज भी रहस्य बनी हुई है।

आतंकवाद की फंडिंग से भी जोड़ा दावा

आरवीएस मणि ने यह भी दावा किया कि उनके गृह मंत्रालय में कार्यकाल के दौरान ऐसी रिपोर्टों पर चर्चा होती थी, जिनमें कहा गया था कि भारत में होने वाली आतंकवादी गतिविधियों के वित्तपोषण का एक बड़ा हिस्सा ड्रग्स तस्करी से आता है। उन्होंने आरोप लगाया कि पाकिस्तान से भारत में ड्रग्स की तस्करी एक संगठित नेटवर्क के तहत की जाती थी।

हालांकि, इन सभी आरोपों पर संबंधित पक्षों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है और उपलब्ध आधिकारिक जांच रिपोर्टों में इन दावों की पुष्टि नहीं की गई है।

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