उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले के नगरासू स्थित गुरुद्वारे में पंजाब से आए निहंगों का डेरा तीसरे दिन भी जारी है। सात निहंगों में से चार ने फिलहाल गुरुद्वारे में ही रुकने का फैसला किया है। उनका कहना है कि वे 25 जून को पंजाब से आने वाले जत्थे का इंतजार कर रहे हैं, जिसके बाद हेमकुंड साहिब के लिए रवाना होंगे।
स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने गुरुद्वारे और आसपास के क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ा दी है। पुलिस, आईटीबीपी और पीएसी के करीब 25 जवान मौके पर तैनात हैं। हालांकि निहंगों ने दावा किया है कि वे किसी को नुकसान नहीं पहुंचाएंगे, लेकिन स्थानीय लोगों में अब भी डर और असमंजस का माहौल बना हुआ है।
शांति व्यवस्था में तैनात जवानों के मुताबिक, निहंग बार-बार अपने बयान और जाने की तारीख बदल रहे हैं। इस बीच मोहाली से आए निहंग परमवीर सिंह ने एक वीडियो जारी कर कहा कि पुलिस-प्रशासन के साथ बातचीत के बाद वे वापस लौटने के लिए तैयार हैं।
विवाद को लेकर गुरुद्वारा संचालक महंत सिंह ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि निहंगों ने लंगर में विवाद किया, सेवादारों के साथ अभद्रता की और गुरुद्वारे पर कब्जा करने की धमकी दी। उन्होंने आरोप लगाया कि निहंगों ने गुरुद्वारे की तीसरी मंजिल पर जाकर सोलर सिस्टम और पानी की व्यवस्था को नुकसान पहुंचाया, जिससे लाखों रुपये की क्षति हुई।
महंत सिंह ने यह भी आरोप लगाया कि एक बुजुर्ग सेवादार को कई घंटों तक बंधक बनाकर रखा गया और प्रशासन के समझाने के बावजूद निहंग नीचे आने को तैयार नहीं हुए। हालांकि बाद में प्रशासन और पुलिस की मध्यस्थता के बाद स्थिति नियंत्रण में आई।
उधर, मामले को लेकर पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से फोन पर बातचीत की और दोनों पक्षों के बीच संवाद के जरिए समाधान निकालने का आग्रह किया। मुख्यमंत्री धामी ने निष्पक्ष कार्रवाई का भरोसा दिलाया है।
गौरतलब है कि पूरा विवाद 16 जून को चमोली जिले के कर्णप्रयाग में हुए एक झगड़े के बाद शुरू हुआ था। इसके बाद तनाव बढ़ता गया और मामला नगरासू गुरुद्वारे तक पहुंच गया। फिलहाल प्रशासन ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए संवेदनशील इलाकों में धारा 163 लागू कर रखी है और पूरे घटनाक्रम की जांच जारी है।
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