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चढ़ावा चोरी जांच में नया मोड़: महंत ने टिन्नू का नाम लिया, चांदी की ईंट पर भी खुलासा

अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले की जांच कर रही स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) अब उन दानदाताओं के बयान दर्ज कर रही है, जिन्होंने मंदिर ट्रस्ट के कर्मचारियों को सोना-चांदी और अन्य बहुमूल्य वस्तुएं सौंपी थीं। जांच एजेंसी यह पता लगा रही है कि दान की गई वस्तुएं किसे सौंपी गईं, उनकी रसीद जारी हुई या नहीं और बाद में उनका क्या हुआ।

इसी क्रम में SIT ने मुंबई के कारोबारी अनिल विश्वकर्मा का बयान दर्ज किया। विश्वकर्मा का आरोप है कि उन्होंने रामलला के लिए करीब 3 किलो चांदी का हार और 1 किलो चांदी की चरण पादुका मंदिर कर्मचारी रामशंकर उर्फ टिन्नू यादव को सौंपी थी, लेकिन उन्हें आज तक कोई रसीद नहीं मिली।

रोकड़िया हनुमान मंदिर के महंत आचार्य विनोद मिश्रा के अनुसार, अनिल विश्वकर्मा का परिवार अक्टूबर 2025 में लगभग 200 किलोमीटर नंगे पैर यात्रा कर अयोध्या पहुंचा था। पूजा-अर्चना के बाद चांदी का हार और चरण पादुका रामलला को अर्पित किए गए। महंत का दावा है कि गर्भगृह में दर्शन के बाद टिन्नू यादव ने दोनों वस्तुएं अपने पास रख ली थीं।

महंत ने आरोप लगाया कि जब भी रसीद या वस्तुओं की जानकारी मांगी गई, तो टिन्नू यादव ने टालमटोल किया। बाद में यह कहा गया कि दोनों वस्तुओं को गलाकर चांदी की ईंटों में बदल दिया गया है। इस जानकारी से दानदाता परिवार खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है।

वहीं, इंडियन बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन के नॉर्थ इंडिया हेड अनुराग रस्तोगी ने भी दान की गई 60 किलो चांदी की ईंटों को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने बताया कि देशभर के सर्राफा कारोबारियों के सहयोग से तैयार की गई चांदी की ईंटें वर्ष 2020 में ट्रस्ट को सौंपी गई थीं। इन ईंटों पर दानदाताओं के नाम और गोत्र अंकित थे तथा इसकी विधिवत रसीद भी जारी की गई थी।

रस्तोगी का कहना है कि चांदी की उन ईंटों के अलावा उनके द्वारा दान किए गए चांदी के दीपक, भोग के कटोरे और अन्य धार्मिक सामग्री भी अब मंदिर परिसर में दिखाई नहीं देती। उन्होंने मांग की है कि दान की गई सभी वस्तुओं का पूरा रिकॉर्ड सार्वजनिक किया जाए।

राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण में लगातार सामने आ रहे नए दावों और आरोपों के बीच SIT अब दानदाताओं, ट्रस्ट कर्मचारियों और पदाधिकारियों के बयानों के आधार पर पूरी श्रृंखला की जांच कर रही है। जांच रिपोर्ट में दान की गई बहुमूल्य वस्तुओं के रिकॉर्ड और उनके रखरखाव से जुड़े तथ्यों को भी शामिल किए जाने की संभावना है।

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