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राखी बांधने से पहले जान लें जरूरी बातें: भद्रा से राहत, राहुकाल और चंद्रग्रहण का क्या होगा असर?

भाई-बहन के अटूट प्रेम और विश्वास का पर्व रक्षाबंधन आज पूरे देश में हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है। इस बार रक्षाबंधन को लेकर खास बात यह है कि राखी बांधने के समय भद्रा का कोई साया नहीं है।

ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस बार रक्षाबंधन पर्व भद्रा काल से पूरी तरह मुक्त है। ऐसे में बहनें पूरे दिन अपने भाइयों की कलाई पर राखी बांध सकती हैं। हालांकि, राहुकाल के समय राखी बांधने से बचने की सलाह दी गई है।

आज सुबह 10 बजकर 31 मिनट से दोपहर 12 बजकर 7 मिनट तक राहुकाल रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दौरान शुभ कार्य करने से बचा जाता है। इसके अलावा दिन के अन्य समय में राखी बांधने पर कोई विशेष बाधा नहीं बताई गई है।

इस बार पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त की सुबह 9 बजकर 8 मिनट से शुरू हुई थी और 28 अगस्त की सुबह 9 बजकर 48 मिनट तक रही। वहीं, भद्रा काल 27 अगस्त की रात 9 बजकर 32 मिनट पर समाप्त हो गया था।

रक्षाबंधन के दिन चंद्रग्रहण भी लग रहा है, लेकिन राहत की बात यह है कि यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, भारत में ग्रहण दिखाई न देने के कारण इसका सूतक काल भी मान्य नहीं होगा।

इस वजह से मंदिरों और धार्मिक अनुष्ठानों पर किसी तरह की रोक नहीं रहेगी और लोग सामान्य रूप से पूजा-पाठ और रक्षाबंधन का पर्व मना सकेंगे।

रक्षाबंधन के अवसर पर बहनें राखी बांधते समय पौराणिक मंत्र का जाप भी कर सकती हैं। इस पर्व पर भाई-बहन एक-दूसरे की खुशहाली, सुरक्षा और लंबी उम्र की कामना करते हैं।

कुल मिलाकर, इस बार रक्षाबंधन पर भद्रा की बाधा नहीं है और चंद्रग्रहण का सूतक काल भी भारत में प्रभावी नहीं माना जा रहा है। बस राहुकाल के समय का ध्यान रखते हुए बहनें पूरे दिन अपने भाइयों को राखी बांध सकती हैं।

आज भाई की कलाई पर बंधने वाली यह राखी सिर्फ एक धागा नहीं, बल्कि प्रेम, विश्वास और जीवनभर साथ निभाने के वादे की डोर है।

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