उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ मानहानि का परिवाद दाखिल किया है। अजय राय के अधिवक्ता संजीव पांडेय ने अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट आलोक वर्मा की अदालत में परिवाद दाखिल कर मुख्यमंत्री के खिलाफ मुकदमा चलाने की मांग की है। मामले में पहली सुनवाई 25 सितंबर 2026 को होगी।
रायबरेली की सभा में दिए बयान को बनाया आधार
परिवाद में अजय राय की ओर से आरोप लगाया गया है कि 23 अगस्त को अयोध्या में निषाद समाज की ओर से आयोजित कार्यक्रम में वह शामिल हुए थे। कार्यक्रम के बाद वहां मत्स्य भोज का आयोजन हुआ था। इस दौरान कार्यक्रम स्थल की तस्वीरें और भोज से जुड़ी तस्वीरें सामने आई थीं।
अजय राय का आरोप है कि इन्हीं तस्वीरों के आधार पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 24 अगस्त को रायबरेली की जनसभा में उनके खिलाफ भ्रामक और अपमानजनक टिप्पणी की। परिवाद में कहा गया है कि मुख्यमंत्री के बयान से उनकी सामाजिक, पारिवारिक और राजनीतिक छवि को नुकसान पहुंचा।
सोशल मीडिया पर भी बयान प्रसारित होने का दावा
परिवाद में कहा गया है कि रायबरेली की जनसभा का वीडियो मुख्यमंत्री के आधिकारिक/व्यक्तिगत एक्स अकाउंट से भी पोस्ट किया गया था। अजय राय की ओर से दावा किया गया है कि वीडियो को बड़ी संख्या में लोगों ने देखा और साझा किया। उनका आरोप है कि बयान के बाद यह मामला समाचार पत्रों, न्यूज चैनलों और सोशल मीडिया पर व्यापक रूप से प्रसारित हुआ, जिससे उनकी प्रतिष्ठा प्रभावित हुई।
अजय राय ने आरोपों को बताया गलत
परिवाद में अजय राय ने कहा है कि वह सनातन धर्म में आस्था रखते हैं और उनके अनुसार उनका मांस-मछली से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि बिना प्रत्यक्ष साक्ष्य के उनके बारे में टिप्पणी की गई, जिससे उन्हें मानसिक और सामाजिक आघात पहुंचा।
अजय राय पहले भी इस मामले में मुख्यमंत्री को चुनौती दे चुके हैं कि उनके मछली खाने का कोई प्रमाण है तो उसे सार्वजनिक किया जाए। उन्होंने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को खारिज किया है।
अब अदालत में होगी आगे की कार्रवाई
अजय राय की ओर से दाखिल परिवाद के बाद अब मामले की अगली प्रक्रिया अदालत में होगी। 25 सितंबर को होने वाली पहली सुनवाई में अदालत परिवाद पर आगे की कार्रवाई को लेकर निर्णय कर सकती है।
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