इंडोनेशिया में अल नीनो और सूखे का असर पाम तेल उत्पादन पर पड़ने की आशंका है। इंडोनेशियाई पाम ऑयल एसोसिएशन (GAPKI) के मुताबिक, खराब मौसम की वजह से क्रूड पाम तेल (CPO) का उत्पादन 50 लाख टन तक घट सकता है। इसका असर अगले साल की शुरुआत से वैश्विक बाजार में आपूर्ति पर दिखाई दे सकता है।
इंडोनेशिया में मौसम की चुनौती के साथ सरकार की B50 बायोडीजल नीति भी पाम तेल की उपलब्धता को प्रभावित कर सकती है। B50 के तहत डीजल में पाम आधारित बायोडीजल की ब्लेंडिंग 40 फीसदी से बढ़ाकर 50 फीसदी की जा रही है। इससे घरेलू स्तर पर पाम तेल की खपत बढ़ेगी और निर्यात के लिए उपलब्ध मात्रा कम हो सकती है। GAPKI के अनुसार, B50 लागू होने पर बायोडीजल के लिए सालाना करीब 1.63 से 1.70 करोड़ टन CPO की खपत हो सकती है।
भारत की बढ़ सकती है चिंता
भारत अपनी खाद्य तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा करता है। ऐसे में इंडोनेशिया और मलेशिया से पाम तेल की आपूर्ति प्रभावित होने पर घरेलू बाजार पर दबाव बढ़ सकता है। भारत में पाम तेल की कीमत बढ़ने पर उपभोक्ताओं की मांग सोयाबीन और सरसों जैसे दूसरे तेलों की ओर बढ़ सकती है, जिससे इनकी कीमतों पर भी असर पड़ने की आशंका है।
CARE Ratings के अनुसार, भारत की खाद्य तेल जरूरत और घरेलू उत्पादन के बीच बड़ा अंतर है और आयात पर निर्भरता के कारण वैश्विक आपूर्ति में बदलाव का असर भारतीय बाजार पर पड़ता है।
तुरंत महंगाई का खतरा कितना?
फिलहाल भारत सरकार के मुताबिक, देश में करीब 14-15 लाख टन खाद्य तेल का स्टॉक मौजूद है, जो लगभग डेढ़ महीने की घरेलू मांग के लिए पर्याप्त है। सितंबर से सोयाबीन और मूंगफली की नई फसल की आवक शुरू होने की उम्मीद है। इसलिए पाम तेल की वैश्विक आपूर्ति में संभावित कमी का असर भारतीय बाजार में तुरंत कितना पड़ेगा, यह कई कारकों पर निर्भर करेगा।
विशेषज्ञों के मुताबिक, CPO की कीमत केवल अल नीनो से तय नहीं होगी। सोयाबीन, सूरजमुखी और अन्य वनस्पति तेलों की कीमत, वैश्विक मांग, बायोडीजल नीतियां और मुद्रा विनिमय दर भी भारतीय खाद्य तेल बाजार को प्रभावित करेंगी।
यानी आने वाले महीनों में पाम तेल की आपूर्ति पर दबाव बढ़ा तो भारत में खाद्य तेलों की कीमतों में तेजी का जोखिम जरूर रहेगा, लेकिन अभी इसे निश्चित बढ़ोतरी के तौर पर देखना जल्दबाजी होगी।
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