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यूपी की सियासत: जयंत चौधरी की रैली से पहले अखिलेश का दांव, 2027 के लिए हिंदू-मुस्लिम समीकरण पर फोकस

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का बुधवार को सहारनपुर दौरा 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों के लिहाज से अहम माना जा रहा है। राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) अध्यक्ष जयंत चौधरी की तीन सितंबर को रामपुर मनिहारान में प्रस्तावित स्वाभिमान रैली से एक दिन पहले अखिलेश का सहारनपुर पहुंचना पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सियासत में चर्चा का विषय बन गया है।

अखिलेश यादव ने दौरे के दौरान पार्टी संगठन के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं से मुलाकात की। साथ ही अलग-अलग प्रमुख नेताओं के घर पहुंचकर उन्होंने पार्टी के सामाजिक आधार और संगठन की स्थिति का जायजा लिया।

हिंदू-मुस्लिम और सामाजिक समीकरण पर जोर

अखिलेश यादव सबसे पहले सपा के राष्ट्रीय महासचिव चौधरी रुद्रसैन और चौधरी इंद्रसैन के आवास पहुंचे। इससे पहले उन्होंने स्टेट बैंक कॉलोनी स्थित सिद्धि विनायक मंदिर में पूजा-अर्चना की।

इसके बाद वह पूर्व सांसद हाजी फजलुर्रहमान के आवास पहुंचे और कार्यकर्ताओं व स्थानीय नेताओं से मुलाकात की। इन मुलाकातों को पश्चिमी यूपी में पार्टी के सामाजिक आधार को मजबूत करने की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।

चौधरी रुद्रसैन के आवास पर पहुंचकर अखिलेश ने हिंदू, किसान और पिछड़े वर्गों से जुड़े सामाजिक समीकरण का संदेश दिया, जबकि हाजी फजलुर्रहमान के घर पहुंचने से मुस्लिम मतदाताओं के बीच पार्टी के आधार को मजबूत रखने का संकेत माना जा रहा है।

सातों विधानसभा सीटों पर टिकट के दावेदार सक्रिय

2027 का विधानसभा चुनाव नजदीक आते ही सहारनपुर की सातों विधानसभा सीटों पर सपा के टिकट के दावेदार सक्रिय हो गए हैं। अखिलेश यादव के दौरे के दौरान कई दावेदारों ने होर्डिंग और पोस्टरों के जरिए अपनी मौजूदगी दर्ज कराई।

जयंत चौधरी की स्वाभिमान रैली ने भी पश्चिमी यूपी में सीटों और राजनीतिक समीकरणों को लेकर चर्चा बढ़ा दी है। रालोद की रैली से यह संकेत मिलने की उम्मीद है कि पार्टी आने वाले विधानसभा चुनाव में किन क्षेत्रों में अपनी राजनीतिक दावेदारी मजबूत करना चाहती है।

ऐसे में सपा के सामने भाजपा से मुकाबले के साथ सहयोगी दलों के बीच संभावित सीट बंटवारे में अपनी स्थिति मजबूत रखने की चुनौती भी होगी।

अखिलेश ने 2022 के चुनाव को लेकर लगाया आरोप

अखिलेश यादव ने 2022 के विधानसभा चुनाव में धांधली का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यदि उस समय बेईमानी नहीं हुई होती तो नकुड़ सीट से चुनाव लड़ने वाले धर्म सिंह सैनी विधायक होते। उन्होंने आरोप लगाया कि अन्य जिलों में भी सपा प्रत्याशियों को हराया गया।

उन्होंने 2027 के चुनाव को लेकर पार्टी की रणनीति और एजेंडे पर भी बात की। अखिलेश ने कहा कि जो लोग समाजवादी पार्टी में आएंगे, सरकार बनने पर उन्हें सम्मान दिया जाएगा। उन्होंने युवाओं की शिक्षा और रोजगार, सस्ती बिजली और महंगाई पर नियंत्रण को पार्टी के प्रमुख मुद्दों में शामिल किया।

24 घंटे में गन्ने के भुगतान का वादा

अखिलेश यादव ने गन्ना किसानों के भुगतान को लेकर भी बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि सपा की सरकार बनने पर किसानों को गन्ने का भुगतान 24 घंटे में किया जाएगा और इसे 48 घंटे तक नहीं खींचा जाएगा।

उन्होंने कहा कि सहारनपुर और आसपास के जिले गन्ना उत्पादन के प्रमुख क्षेत्र हैं। उनके मुताबिक यह क्षेत्र एथनॉल उत्पादन से भी जुड़ा है। उन्होंने किसानों को उनकी उपज का उचित लाभ मिलने की जरूरत पर जोर दिया।

चार नेताओं के घर पहुंचे अखिलेश

अखिलेश यादव ने एक ही दिन में कई प्रमुख नेताओं से मुलाकात की। वह पूर्व विधायक मनोज चौधरी और पूर्व राज्य मंत्री विनोद तेजियान के घर भी पहुंचे। इन मुलाकातों को भी पार्टी के संगठन और सामाजिक समीकरण को मजबूत करने की कवायद के तौर पर देखा जा रहा है।

जयंत चौधरी की रैली पर सबकी नजर

अखिलेश यादव के सहारनपुर दौरे के अगले दिन यानी तीन सितंबर को जयंत चौधरी की रामपुर मनिहारान में स्वाभिमान रैली प्रस्तावित है। रालोद की इस रैली में पार्टी की पश्चिमी यूपी की राजनीतिक रणनीति और 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर उसके रुख पर नजर रहेगी।

दोनों नेताओं की लगातार सक्रियता ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश की सियासत में संभावित गठजोड़, सीटों के बंटवारे और सामाजिक समीकरणों को लेकर चर्चाएं तेज कर दी हैं।

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