Saturday , August 29 2026

ईरान पर बढ़ते दबाव से तेल बाजार में हलचल, भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है बड़ा असर

ईरान के खिलाफ अमेरिका के बढ़ते आर्थिक दबाव और पश्चिम एशिया में गहराते तनाव ने भारत की चिंता बढ़ा दी है। सबसे बड़ा खतरा कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल का है, क्योंकि भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा करता है। मॉर्गन स्टेनली ने 2026 की चौथी तिमाही के लिए ब्रेंट क्रूड के अनुमान को बढ़ाकर 100 डॉलर प्रति बैरल तक कर दिया है।

भारत के लिए खतरा सिर्फ महंगे कच्चे तेल तक सीमित नहीं है। तेल की कीमत बढ़ने से पेट्रोल-डीजल, विमान ईंधन और माल ढुलाई महंगी हो सकती है, जिसका असर रोजमर्रा की वस्तुओं की कीमतों और महंगाई पर पड़ सकता है। महंगा आयात भारत के व्यापार घाटे और रुपये पर भी दबाव बढ़ा सकता है। भारत अपनी तेल जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है, इसलिए पश्चिम एशिया में सप्लाई बाधित होना बड़ी आर्थिक चुनौती बन सकता है।

तनाव की एक और बड़ी वजह होर्मुज जलडमरूमध्य है, जिससे वैश्विक तेल और LNG व्यापार का बड़ा हिस्सा गुजरता है। अगर इस मार्ग पर लंबे समय तक बाधा बनी रहती है तो तेल बाजार में सप्लाई संकट गहरा सकता है। हालांकि 27 अगस्त की ताजा रिपोर्टों में कूटनीतिक बातचीत की उम्मीद से ब्रेंट क्रूड में गिरावट भी दर्ज की गई, इसलिए 100 डॉलर का स्तर फिलहाल एक अनुमान और जोखिम परिदृश्य है, तय कीमत नहीं।

इसके साथ ही भारत के सामने रूसी तेल को लेकर भी मुश्किल बढ़ सकती है। अमेरिका के बढ़ते प्रतिबंधों और संभावित दंडात्मक कार्रवाई के कारण सस्ते रूसी तेल की खरीद अधिक जटिल हो सकती है। ऐसे में भारत को पश्चिम एशिया के तनाव, महंगे तेल और वैकल्पिक सप्लाई की चुनौती—तीनों मोर्चों पर संतुलन बनाना होगा।

Check Also

महंगाई से राहत की कोशिश: दिल्लीवासियों को 35 रुपये प्रति किलो मिलेगा प्याज

देश में प्याज की बढ़ती कीमतों ने आम लोगों की रसोई का बजट बिगाड़ना शुरू ...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *