विजय ने अपने भाषण की शुरुआत यह कहकर की, एन नेंजिल कुडियिरुकुम अनबाना नानबा और नानबिगल. मुझे लगा कि आप सभी मेरे दिल में रह रहे हैं. एहसास हुआ कि मैं भी तुममें जी रहा हूं. आप वे मंदिर हैं जिनमें मैं रह रहा हूं. मुझे नहीं पता कि मैं इस प्यार के लिए क्या कर सकता हूं जो बदले में कुछ भी उम्मीद नहीं करता है. हाल ही में, मैं देख रहा हूं कि सोशल मीडिया पर बहुत गुस्सा है. क्यों? हमारे पास करने को बहुत कुछ है. यदि पिता उसे पीटें तो बच्चा घर पर क्या करेगा? ऐसे ही सब माफ कर दो. जैसा कि गांधी ने कहा था, ‘अहिंसा हिंसा से अधिक शक्तिशाली है.’
विजय ने बाद में उन सभी लोगों को धन्यवाद दिया जो लियो की यात्रा के दौरान उनके साथ थे.अपना भाषण समाप्त करने से पहले, उन्होंने फिर से माइक संभाला और शाम का सबसे बड़ा बयान दिया जिससे उनके फैंस क्रेजी हो गए और उनके द्वारा कही गई इन लाइनों में सभी का ध्यान खींचा.
एक्टर ने आगे कहा, ‘मैं इस मंच पर यही बताने आया हूं. मैंने यह बात कई बार कही है, लेकिन मैं एक बार फिर स्थिति स्पष्ट करना चाहता हूं. तमिल सिनेमा ने हमें जितने भी सितारे दिए हैं, उनमें केवल एक पुरैची थलाइवर (एमजी रामचंद्रन), केवल एक नादिगर थिलागम (शिवाजी गणेशन), केवल एक कैप्टन (विजयकांत), केवल एक उलगनायगन (कमल हासन) हैं. एक सुपरस्टार (रजनीकांत) और इसी तरह थाला (अजित कुमार) भी एक ही हैं. आगे विजय कहते हैं, ‘आप जानते हैं कि थलापति राजाओं से आदेश लेने वाले सैनिक हैं. राजा आदेश देंगे, और थलापति कार्य पूरा करेंगे. जहां तक मेरा सवाल है, आप सभी राजा हैं और मैं आपका थलापति हूं. मैं आपकी सेवा में एक थलापति (कमांडर) हूं.’
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