अयोध्या स्थित राम मंदिर परिसर में 26 अक्टूबर को पहली बार महर्षि वाल्मीकि जयंती मनाई जाएगी। इस आयोजन के जरिए सामाजिक समरसता और समानता का संदेश देने की पहल की जा रही है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से आयोजित कार्यक्रम में वाल्मीकि समाज के संतों के साथ अयोध्या के प्रमुख संत और धर्माचार्य शामिल होंगे।
200 अतिथियों की मौजूदगी में होगा पूजन
कार्यक्रम में करीब 200 अतिथियों के शामिल होने की संभावना है। इस दौरान सप्तमंडपम स्थित महर्षि वाल्मीकि मंदिर में उनकी प्रतिमा का अभिषेक और विधि-विधान से पूजन किया जाएगा। आयोजन की जिम्मेदारी राम मंदिर ट्रस्ट की सदस्य डॉ. निर्मला यादव को सौंपी गई है।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राम मंदिर की धार्मिक समिति के सदस्य महंत मिथिलेश नंदिनी शरण होंगे। वहीं, आचार्य इंद्रदेव मिश्र और आचार्य केशव के संयोजन में धार्मिक अनुष्ठान संपन्न कराए जाएंगे।
सामाजिक समरसता का दिया जाएगा संदेश
आचारी मंदिर के पीठाधिपति महंत विवेक आचारी के अनुसार, महर्षि वाल्मीकि को आदिकवि और रामायण के रचयिता के रूप में श्रद्धापूर्वक स्मरण किया जाता है। रामकथा की परंपरा में उनका विशेष स्थान है।
राम मंदिर परिसर में उनकी जयंती मनाने का उद्देश्य धार्मिक आस्था के साथ सामाजिक समरसता के संदेश को मजबूत करना भी है। इस आयोजन के माध्यम से समाज के विभिन्न वर्गों और संत परंपराओं को एक मंच पर लाने का प्रयास किया जा रहा है।
संत परंपरा और सामाजिक एकता पर जोर
अयोध्या में होने वाला यह आयोजन महर्षि वाल्मीकि के योगदान को स्मरण करने के साथ समाज में समानता और एकता का संदेश देने पर केंद्रित रहेगा। कार्यक्रम में संतों और धर्माचार्यों की भागीदारी के जरिए सामाजिक समरसता की भावना को आगे बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा।
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