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अयोध्या के संतों को राम मंदिर ट्रस्ट में जगह मिलने की उम्मीद क्यों कम? सामने आई बड़ी वजह

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के संभावित पुनर्गठन को लेकर अयोध्या के संत समाज में चर्चा तेज है। ट्रस्ट में अयोध्या के किसी नए संत को शामिल किए जाने की अटकलें लगाई जा रही हैं, लेकिन मौजूदा समीकरणों को देखते हुए इसकी संभावना कम नजर आ रही है।

ट्रस्ट में पहले से ही संत समाज का प्रतिनिधित्व है। इसके अलावा धार्मिक मामलों के लिए बनाई गई धार्मिक समिति में भी अयोध्या समेत संत परंपरा से जुड़े नौ संत शामिल हैं। ऐसे में ट्रस्ट में किसी नए संत को जगह देने की जरूरत और उपलब्ध स्थान, दोनों पर सवाल खड़े हो रहे हैं।

ट्रस्ट में पहले से छह संत सदस्य

मौजूदा संरचना पर नजर डालें तो ट्रस्ट में छह संत सदस्य हैं। वहीं धार्मिक समिति में भी नौ संतों की मौजूदगी है। यानी राम मंदिर से जुड़े निर्णय लेने वाली मुख्य संस्था और धार्मिक मामलों की समिति, दोनों स्तरों पर संत समाज को प्रतिनिधित्व हासिल है।

यही वजह है कि अयोध्या के किसी नए संत की ट्रस्ट में एंट्री की दावेदारी फिलहाल कमजोर मानी जा रही है। एक ट्रस्टी का भी मानना है कि ट्रस्ट में संतों का प्रतिनिधित्व पहले से पर्याप्त है।

संघ और विहिप को मिल सकता है प्रतिनिधित्व

ट्रस्ट में संभावित बदलाव को लेकर सबसे अहम चर्चा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के एक-एक पदाधिकारी को प्रतिनिधित्व दिए जाने की है।

मौजूदा जानकारी के मुताबिक, पूर्व महासचिव चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्र के स्थान पर संघ और विहिप के पदाधिकारियों को शामिल किए जाने की संभावना है। चंपत राय की जगह विहिप और डॉ. अनिल मिश्र की जगह संघ से जुड़े पदाधिकारी को जिम्मेदारी दिए जाने की चर्चा है।

अब सभी की निगाहें 2 सितंबर को होने वाली श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक पर टिकी हैं। इसी बैठक में ट्रस्ट के संभावित बदलावों को लेकर तस्वीर और साफ हो सकती है।

अयोध्या के संतों की दावेदारी क्यों कमजोर?

अयोध्या के कई संत लंबे समय से ट्रस्ट में प्रतिनिधित्व की मांग या संभावना को लेकर चर्चा में रहे हैं। लेकिन मौजूदा व्यवस्था में ट्रस्ट के भीतर छह संतों और धार्मिक समिति में नौ संतों की मौजूदगी उनके लिए चुनौती बन रही है।

ट्रस्ट से जुड़े एक सदस्य के मुताबिक, संत समाज को पहले से पर्याप्त प्रतिनिधित्व मिला हुआ है। ऐसे में यदि बदलाव होता है तो संगठनात्मक प्रतिनिधित्व को प्राथमिकता मिलने की संभावना ज्यादा है।

राम मंदिर ट्रस्ट में कौन-कौन?

मौजूदा ट्रस्ट में महंत नृत्यगोपाल दास अध्यक्ष, डॉ. कृष्ण मोहन अंतरिम महासचिव और गोविंददेव गिरि कोषाध्यक्ष हैं। इसके अलावा महंत दिनेंद्र दास, नृपेंद्र मिश्र, जगद्गुरु वासुदेवानंद सरस्वती, जगद्गुरु विश्वप्रसन्न तीर्थ, युगपुरुष परमानंद और केशव परासरण समेत अन्य सदस्य शामिल हैं।

ट्रस्ट में अयोध्या के डीएम, केंद्रीय गृह सचिव और राज्य के गृह सचिव पदेन सदस्य हैं।

वहीं धार्मिक समिति में गोविंददेव गिरि, महंत कमलनयन दास, महंत डॉ. रामानंद दास, महंत दिनेंद्र दास, अधिकारी राजकुमार दास, महंत मिथिलेश नंदिनी शरण, वासुदेवानंद सरस्वती, जगद्गुरु विश्वप्रसन्न तीर्थ और युगपुरुष परमानंद शामिल हैं।

चढ़ावा चोरी मामले में भी अपडेट

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में दर्ज रिपोर्ट की विवेचना अदालत की निगरानी में कराने के लिए अधिवक्ता संघ के मॉनिटरिंग प्रार्थना पत्र पर विवेचक ने शनिवार को भी आपत्ति दाखिल नहीं की।

विशेष न्यायाधीश एंटी करप्शन कोर्ट रजत वर्मा ने विवेचक को आपत्ति प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। वहीं अधिवक्ता संघ की ओर से भी पैरवी के लिए कोर्ट में कोई मौजूद नहीं रहा।

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