उत्तर प्रदेश में गन्ने की खेती से किसानों का रुझान लगातार कम होता जा रहा है। बीते तीन वर्षों के दौरान प्रदेश में गन्ने का रकबा करीब चार फीसदी घट गया है, जिसका सीधा असर चीनी उत्पादन पर पड़ा है। आंकड़ों के मुताबिक, इस अवधि में चीनी उत्पादन में करीब 14 फीसदी की कमी दर्ज की गई है। उत्पादन घटने के साथ ही बाजार में चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी भी देखने को मिल रही है।
उत्तर प्रदेश चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास विभाग के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2023-24 में प्रदेश में गन्ने का कुल रकबा 29.66 लाख हेक्टेयर था, जो वर्ष 2025-26 में घटकर 28.61 लाख हेक्टेयर रह गया। यानी तीन साल में करीब 1.05 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में गन्ने की खेती कम हो गई।
इसका असर चीनी उत्पादन पर भी साफ दिखाई दिया। वर्ष 2023-24 में प्रदेश में 104.13 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ था, जो 2025-26 में घटकर 89.52 लाख टन रह गया। इस तरह गन्ने के रकबे में अपेक्षाकृत कम गिरावट के बावजूद चीनी उत्पादन में बड़ी कमी दर्ज की गई।
विशेषज्ञों के अनुसार, मौसम की मार के साथ अगोला बेधक कीट और रेड रॉट जैसी बीमारियों ने गन्ने की फसल को काफी नुकसान पहुंचाया। रेड रॉट बीमारी के कारण उत्पादन प्रभावित हुआ और किसानों को नुकसान उठाना पड़ा।
वहीं दूसरी ओर, प्रदेश में किसानों का रुझान मक्का और धान जैसी फसलों की ओर बढ़ रहा है। अनाज आधारित डिस्टिलरी को बढ़ावा मिलने के बाद मक्का और धान की मांग बढ़ी है, जिससे किसान इन फसलों की खेती को अधिक प्राथमिकता देने लगे हैं।
आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2023-24 में प्रदेश में मक्का का उत्पादन 18.20 लाख टन था, जो 2025-26 में बढ़कर 22.80 लाख टन पहुंच गया। इसी तरह धान का उत्पादन भी 159.90 लाख मीट्रिक टन से बढ़कर 170.50 लाख मीट्रिक टन हो गया है।
गन्ने का रकबा घटने, फसल उत्पादन में कमी और किसानों के दूसरी फसलों की ओर रुख करने से प्रदेश में चीनी उत्पादन प्रभावित हुआ है। माना जा रहा है कि यही कारण चीनी की बढ़ती कीमतों के पीछे एक बड़ी वजह बन रहा है।
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