उत्तराखंड में जनगणना 2027 के दूसरे चरण की तैयारियां तेज हो गई हैं। राज्य के हिमाच्छादित क्षेत्रों में 17 अगस्त से डिजिटल स्व-गणना की प्रक्रिया शुरू होगी। लोगों को 15 दिन तक पोर्टल के माध्यम से घर बैठे अपनी जानकारी दर्ज करने का मौका मिलेगा। इसके बाद एक से 30 सितंबर के बीच प्रगणक घर-घर जाकर जनगणना का कार्य पूरा करेंगे।
इस बार जनगणना में पारंपरिक जानकारियों के साथ कई नए पहलुओं को भी शामिल किया गया है। नागरिकों की सामान्य साक्षरता के साथ डिजिटल साक्षरता की स्थिति भी दर्ज की जाएगी। इसके अलावा रोजगार, आर्थिक गतिविधि, व्यवसाय, उद्योग और कार्यस्थल तक आने-जाने से संबंधित जानकारी ली जाएगी।
जनगणना में जन्मस्थान, पूर्व निवास स्थान, स्थान परिवर्तन का कारण और वर्तमान स्थान पर रहने की अवधि से जुड़े सवाल भी पूछे जाएंगे। कोविड-19 टीकाकरण के स्थान और बैंक खातों की संख्या जैसी जानकारी भी दर्ज की जाएगी। आधार, मोबाइल नंबर, वोटर आईडी और पासपोर्ट जैसी जानकारियां उपलब्ध होने पर ली जाएंगी।
चार जिलों के 131 गांव और तीन नगर पंचायतें शामिल
उत्तराखंड के उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग और पिथौरागढ़ जिले के हिमाच्छादित क्षेत्रों में जनगणना की जाएगी। इन क्षेत्रों में कुल 131 गांव और तीन नगर पंचायतें शामिल हैं।
उत्तरकाशी में 69 गांव और गंगोत्री नगर पंचायत, चमोली में 23 गांव और बदरीनाथ नगर पंचायत तथा रुद्रप्रयाग में चार गांव और केदारनाथ नगर पंचायत हिमाच्छादित क्षेत्र में आते हैं। वहीं पिथौरागढ़ के 35 गांव भी इस श्रेणी में शामिल हैं। इन क्षेत्रों की अनुमानित आबादी करीब 52 हजार है।
162 प्रगणक और 34 सुपरवाइजर तैनात
हिमाच्छादित क्षेत्रों में जनगणना का कार्य सुचारु रूप से कराने के लिए 162 प्रगणक और 34 सुपरवाइजर लगाए गए हैं। अधिकारियों के अनुसार, डिजिटल स्व-गणना के बाद सितंबर में घर-घर जाकर जानकारी का सत्यापन और संग्रह किया जाएगा।
जनगणना में लोगों से परिवार, शिक्षा, रोजगार, प्रवास, वैवाहिक स्थिति, भाषा, सामाजिक वर्ग और अन्य सामाजिक-आर्थिक पहलुओं से जुड़े कुल 40 सवाल पूछे जाएंगे।
satyamorcha.com Hindi News, latest and breaking news in Hindi