म्यूचुअल फंड में निवेश करने वालों के लिए अहम खबर है। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) की वार्षिक रिपोर्ट 2025-26 के मुताबिक, म्यूचुअल फंड में लावारिस पड़ी कुल रकम 31 मार्च 2026 तक बढ़कर ₹3,811 करोड़ हो गई है। इसमें लावारिस लाभांश और रिडेम्पशन की रकम शामिल है।
लावारिस रकम में कितना हुआ इजाफा?
SEBI के आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 के अंत में म्यूचुअल फंड में लावारिस लाभांश की रकम ₹2,324 करोड़ थी, जो 2025-26 में बढ़कर ₹2,689 करोड़ हो गई। यानी इसमें करीब 15.7 फीसदी की बढ़ोतरी हुई।
वहीं, लावारिस रिडेम्पशन की रकम मामूली रूप से घटकर ₹1,122 करोड़ रह गई, जो पिछले वित्त वर्ष में ₹1,128 करोड़ थी। दोनों रकम को मिलाने पर कुल लावारिस राशि ₹3,811 करोड़ पहुंच गई है।
आपका पैसा क्यों हो सकता है लावारिस?
कई बार निवेशक अपना मोबाइल नंबर, ईमेल, पता या बैंक खाता बदलने के बाद म्यूचुअल फंड खाते में जानकारी अपडेट नहीं करते। ऐसे में लाभांश या रिडेम्पशन की रकम निवेशक तक नहीं पहुंच पाती।
निवेशक की मृत्यु के बाद नॉमिनी की जानकारी अपडेट न होना भी रकम के लावारिस रहने की एक वजह हो सकती है।
SEBI ने उठाए ये कदम
SEBI ने निवेशकों और उनके नॉमिनी के लिए लावारिस रकम तक पहुंच आसान बनाने के लिए कई डिजिटल कदम उठाए हैं। इनमें म्यूचुअल फंड और डीमैट होल्डिंग्स को DigiLocker से जोड़ने की सुविधा शामिल है। इससे निवेशक अपनी निवेश संबंधी जानकारी एक जगह देख सकते हैं।
इसके अलावा, नॉमिनी के लिए केंद्रीकृत व्यवस्था भी शुरू की गई है। इसके तहत निवेशक की मृत्यु की सूचना KYC Registration Agency के पास दर्ज किए जाने के बाद जानकारी को संबंधित वित्तीय मध्यस्थों तक अपडेट करने की व्यवस्था की गई है।
‘निवेशक शिविर’ से मिलेगी मदद
SEBI और Investor Education and Protection Fund Authority (IEPFA) ने निवेशकों की मदद के लिए ‘निवेशक शिविर’ पहल भी शुरू की है। इसके तहत निवेशकों को अनक्लेम्ड शेयर और लाभांश से जुड़े मामलों में सहायता दी जाती है।
इन शिविरों में KYC और नॉमिनी की जानकारी अपडेट करने, सिक्योरिटीज को डीमैट में बदलने और संबंधित क्लेम प्रक्रिया में मदद दी जाती है।
निवेशकों को क्या करना चाहिए?
निवेशकों को समय-समय पर अपने म्यूचुअल फंड पोर्टफोलियो की जानकारी जांचनी चाहिए। मोबाइल नंबर, ईमेल, पता, बैंक खाते और नॉमिनी की जानकारी में बदलाव होने पर उसे तुरंत अपडेट करना जरूरी है।
अगर किसी निवेशक को लगता है कि उसका कोई लाभांश या रिडेम्पशन भुगतान नहीं मिला है, तो उसे संबंधित AMC या रजिस्ट्रार से संपर्क कर अपने निवेश और बकाया रकम की जानकारी लेनी चाहिए।
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