अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों को यथावत रखने के फैसले के बाद गुरुवार को भारतीय शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव का माहौल देखने को मिला। शुरुआती बढ़त के बावजूद कारोबार के दौरान सेंसेक्स और निफ्टी सीमित दायरे में कारोबार करते रहे। हालांकि आईटी शेयरों में खरीदारी से बाजार को कुछ सहारा मिला, जबकि रियल्टी सेक्टर दबाव में रहा।
कारोबार के दौरान सेंसेक्स मामूली गिरावट के साथ 77,643.80 अंक पर कारोबार करता दिखाई दिया, जबकि निफ्टी 24,260.15 अंक के आसपास हल्की बढ़त के साथ बना रहा। शुरुआती सत्र में दोनों प्रमुख सूचकांकों ने मजबूत शुरुआत की थी, लेकिन वैश्विक संकेतों और निवेशकों की सतर्कता के चलते बाजार में लगातार उतार-चढ़ाव बना रहा।
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि फेड के ब्याज दरों को स्थिर रखने के फैसले से फिलहाल राहत मिली है, लेकिन वर्ष के अंत तक दरों में संभावित बदलाव के संकेतों ने निवेशकों को सतर्क बनाए रखा है। इसका असर भारतीय बाजार की चाल पर भी देखने को मिला।
आईटी सेक्टर के शेयरों में सबसे अधिक मजबूती दर्ज की गई, जबकि रियल्टी कंपनियों के शेयरों में बिकवाली का दबाव रहा। रुपये में सुधार और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की शॉर्ट कवरिंग ने भी बाजार की धारणा को सकारात्मक बनाए रखने में अहम भूमिका निभाई।
वैश्विक बाजारों में भी मिला-जुला रुख देखने को मिला। अमेरिकी बाजारों के संकेत सकारात्मक रहे, जबकि जापान और ऑस्ट्रेलिया के प्रमुख सूचकांक दबाव में रहे। हांगकांग का हैंग सेंग लगभग सपाट रहा, जबकि चीन का शंघाई कंपोजिट सूचकांक गिरावट के साथ कारोबार करता दिखा। यूरोपीय बाजारों के शुरुआती संकेत हालांकि सकारात्मक रहे।
विश्लेषकों के मुताबिक, निकट अवधि में निफ्टी के लिए 24,500 से 24,600 अंक का स्तर अहम प्रतिरोध माना जा रहा है। यदि सूचकांक इस दायरे को पार करने में सफल रहता है तो बाजार में आगे नई तेजी देखने को मिल सकती है। वहीं, वैश्विक आर्थिक घटनाक्रम और विदेशी निवेशकों की गतिविधियां आने वाले कारोबारी सत्रों में बाजार की दिशा तय करेंगी।
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