उत्तराखंड में लगातार हो रही भारी बारिश का असर चारधाम यात्रा पर भी देखने को मिल रहा है। गौरीकुंड से आगे केदारनाथ पैदल यात्रा मार्ग पर कई स्थानों पर मलबा और बड़े पत्थर गिरने से गुरुवार सुबह यात्रा अस्थायी रूप से रोक दी गई। यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए प्रशासन ने आवाजाही पर रोक लगा दी है, जबकि मार्ग को जल्द खोलने के लिए राहत एवं बचाव टीमें युद्धस्तर पर काम कर रही हैं।
जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी नंदन सिंह रजवार के अनुसार, रातभर हुई बारिश के कारण गौरीकुंड से आगे दो-तीन स्थानों पर भूस्खलन हुआ, जिससे पैदल मार्ग बाधित हो गया। मौके पर डीडीआरएफ, वाईएमएफ और संबंधित विभागों की टीमें तैनात हैं। जेसीबी मशीनों की मदद से मलबा हटाने का काम जारी है और मौसम अनुकूल होने पर मार्ग को दोबारा खोला जाएगा।
लगातार बारिश के कारण रुद्रप्रयाग जिले की प्रमुख नदियां अलकनंदा और मंदाकिनी भी उफान पर हैं। जिला आपातकालीन परिचालन केंद्र के अनुसार, सुबह अलकनंदा का जलस्तर 626.89 मीटर और मंदाकिनी का जलस्तर 625.90 मीटर दर्ज किया गया, जो दोनों नदियों के चेतावनी स्तर से ऊपर और खतरे के निशान के बेहद करीब है। प्रशासन ने नदी किनारे रहने वाले लोगों और श्रद्धालुओं से सतर्क रहने तथा नदी तटों से दूर रहने की अपील की है।
पिछले 24 घंटों में जखोली में 54 मिमी, ऊखीमठ में 38.20 मिमी और रुद्रप्रयाग में चार मिमी बारिश दर्ज की गई। जिले में लगातार बादल और घना कोहरा छाया हुआ है, जिससे हालात और चुनौतीपूर्ण बने हुए हैं।
बारिश के चलते रुद्रप्रयाग जिले में राष्ट्रीय राजमार्ग सहित 29 सड़कें भी बंद हो गई हैं। इनमें केदारनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच-107) मुनकटिया, सोनप्रयाग और गौरीकुंड के बीच कई स्थानों पर मलबा आने से बाधित है। प्रशासन का कहना है कि मौसम में सुधार होते ही सभी मार्गों को प्राथमिकता के आधार पर खोलने का प्रयास किया जाएगा।
प्रशासन ने चारधाम यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे यात्रा शुरू करने से पहले मौसम और मार्ग की ताजा जानकारी अवश्य लें तथा प्रशासन की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें।
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