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अयोध्या राम मंदिर के धार्मिक कार्यों को मिलेगी नई दिशा, 38 नामों पर विचार के बाद बनी समिति

श्रीराम जन्मभूमि मंदिर की धार्मिक परंपराओं और आध्यात्मिक गतिविधियों के संचालन को और व्यवस्थित बनाने के लिए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने 9 सदस्यीय धार्मिक समिति का गठन किया है। समिति के गठन से पहले 38 प्रमुख संतों और धर्माचार्यों के नामों पर कई दौर की चर्चा और मंथन किया गया, जिसके बाद नौ संतों को अंतिम रूप से समिति में शामिल किया गया।

समिति में ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देवगिरि, जगद्गुरु वासुदेवानंद सरस्वती, योग पुरुष परमानंद, जगद्गुरु विश्वप्रसन्न तीर्थ, महंत कमलनयन दास, अधिकारी राजकुमार दास, महंत मिथिलेश नंदिनी शरण, महंत डॉ. रामानंद दास और महंत दिनेंद्र दास को सदस्य बनाया गया है।

सूत्रों के अनुसार, समिति के गठन के दौरान विभिन्न अखाड़ों, पीठों और धार्मिक परंपराओं से जुड़े संतों के नामों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। उद्देश्य ऐसी समिति तैयार करना था, जो राम मंदिर में होने वाले धार्मिक अनुष्ठानों, पर्व-उत्सवों, विशेष पूजन और वैदिक परंपराओं के संचालन में मार्गदर्शन दे सके।

ट्रस्ट का मानना है कि अनुभवी संतों की सहभागिता से मंदिर की धार्मिक गरिमा और सनातन परंपराओं को और अधिक मजबूती मिलेगी। अब राम मंदिर में आयोजित होने वाले प्रमुख धार्मिक आयोजनों, वैदिक अनुष्ठानों और पूजा-पद्धति से जुड़े महत्वपूर्ण निर्णयों में इस समिति की अहम भूमिका रहेगी।

समिति की खास बात यह है कि इसमें शामिल कई संत परंपरा के साथ आधुनिक माध्यमों पर भी सक्रिय हैं। कुछ सदस्य सोशल मीडिया और लिंक्डइन जैसे प्लेटफॉर्म पर धर्म और संस्कृति से जुड़े विचार साझा करते हैं, जबकि कई सदस्य गुरुकुलों का संचालन, वैदिक शिक्षा और राम जन्मभूमि आंदोलन से लंबे समय से जुड़े रहे हैं। इससे धार्मिक परंपरा और आधुनिक सोच का संतुलित समन्वय देखने को मिलता है।

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