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आशुतोष महाराज अब “सनातन न्याय यात्रा” निकालेंगे; अनुमति के लिए पत्र सौंपा

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के खिलाफ यौन उत्पीड़न का केस कराने वाले आशुतोष महाराज अब “सनातन न्याय यात्रा” निकालेंगे। आशुतोष ब्रह्मचारी महाराज ने न्याय यात्रा की अनुमति के लिए मुख्य सचिव (गृह), प्रमुख सचिव (गृह) के साथ ही उत्तर प्रदेश शासन लखनऊ को अनुमति देने के लिए अपने पैड पर पत्र सौंपा है।

उत्तर प्रदेश सरकार को भेजे पत्र में आशुतोष महाराज ने कहा है कि यात्रा में श्री कृष्ण सेना, राधा वाहिनी, राष्ट्रीय ब्राह्मण युवजन सभा (देशभर के पदाधिकारी) और अन्य संगठन शामिल होंगे।

जानिये आशुतोष महाराज ने पत्र में क्या कहा

“सनातन न्याय यात्रा” को प्रयागराज संगम से प्रारंभ कर उत्तर प्रदेश के समस्त जनपदों, ग्रामों एवं अन्य राज्यों में शांतिपूर्ण एवं विधि-सम्मत रूप से आयोजित करते हुए वाराणसी स्थित विद्या मठ पर समापन करने हेतु अनुमति प्रदान किए जाने के संबंध में।

आशुतोष महाराज का कहना है कि सनातन धर्म के संत-महात्माओं एवं विभिन्न धार्मिक-सामाजिक संगठनों द्वारा समाज में सकारात्मक जागरूकता, सनातन परंपराओं की मर्यादा की रक्षा, सामाजिक समरसता तथा राष्ट्रीय एकता के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से “सनातन न्याय यात्रा” आयोजित किए जाने का प्रस्ताव है।

यह यात्रा प्रयागराज स्थित पवित्र संगम स्थल से प्रारंभ होकर उत्तर प्रदेश के समस्त जनपदों, तहसीलों, नगरों एवं ग्रामों में चरणबद्ध रूप से आयोजित की जाएगी तथा आवश्यकतानुसार अन्य राज्यों में भी संचालित होते हुए अंततः वाराणसी स्थित विद्या मठ पर विधिवत समापन की जाएगी।

यह स्पष्ट किया जाता है कि यात्रा की तिथि एवं विस्तृत कार्यक्रम स्थानीय प्रशासन एवं शासन से आवश्यक अनुमति प्राप्त होने के उपरांत ही निर्धारित किए जाएंगे तथा संबंधित अधिकारियों को पूर्व में सूचित किया जाएगा।

संगठनों एवं पदाधिकारियों सहयोग रहेगा

1. श्री कृष्ण सेना

2. राधा वाहिनी

3. राष्ट्रीय ब्राह्मण युवजन सभा (देशभर के पदाधिकारी)

4. अन्य संगठन

राष्ट्रीय संगठन मंत्री श्री कृष्ण सेना, जिन्हें यात्रा के सफल संचालन एवं समन्वय हेतु विधिवत रूप से यात्रा का संयोजक नियुक्त किया गया है। तथा प्रत्येक राज्यों में वहा के अध्यक्ष ही राज्य संयोजक रहेगे

विशेष उद्देश्य

आदि गुरु शंकराचार्य की गद्दी की रक्षा, सम्मान एवं परंपरागत अधिकारों के संरक्षण हेतु समाज में विशेष जागरूकता उत्पन्न करना तथा सनातन परंपराओं की मर्यादा को सुरक्षित रखना।

प्रमुख उद्देश्य

1. सनातन परंपराओं एवं धार्मिक, आदि गुरु शंकराचार्य की परंपरा / मर्यादाओं की रक्षा एवं प्रचार-प्रसार करना।

2. समाज में सकारात्मक जागरुकता, नैतिक मूल्यों एवं सामाजिक समरसता का संदेश देना।

3. युवाओं एवं बटुको के नैतिक, सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक विकास के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाना।

4. गुरुकुलों एवं धार्मिक संस्थानों में अनुशासन, सुरक्षा एवं पारदर्शिता सुनिश्चित करने के संबंध में जन-जागरूकता बढ़ाना।

5. संविधान एवं विधि के दायरे में रहकर शांतिपूर्ण सामाजिक संवाद एवं जनजागरण स्थापित करना।

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