उत्तर प्रदेश के कौशांबी जिले में पटाखा फैक्टरी में हुए भीषण विस्फोट के मामले में पुलिस ने मुख्य आरोपी नौशाद को मुठभेड़ के बाद गिरफ्तार कर लिया है। सोमवार को हुए इस हादसे में आठ बच्चों समेत 11 लोगों की मौत हुई थी, जबकि पांच लोग घायल हुए हैं।
पुलिस के अनुसार, मंगलवार सुबह करीब चार बजे आरोपी के भागने की सूचना मिली थी। इसके बाद चरवा थाना क्षेत्र के 13 मील सराय सहावा रोड पर पुलिस ने घेराबंदी की। खुद को घिरा देख आरोपी ने पुलिस टीम पर गोली चला दी। जवाबी कार्रवाई में गोली लगने से नौशाद घायल हो गया। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर मंझनपुर जिला अस्पताल में भर्ती कराया। अन्य आरोपियों की तलाश जारी है।
आरोपी के पटाखा गोदाम पर चला बुलडोजर
विस्फोट के बाद प्रशासन ने आरोपी नौशाद के पटाखा गोदाम के खिलाफ भी कार्रवाई की। जिलाधिकारी अमित पाल के निर्देश पर घटनास्थल से करीब 400 मीटर दूर स्थित गोदाम को जेसीबी की मदद से ध्वस्त कर दिया गया।
डीएम ने कहा कि आरोपी के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन अब फैक्टरी और गोदाम से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच करेगा।
2024 में रद्द हो चुका था फैक्टरी का लाइसेंस
अधिकारियों के मुताबिक, संबंधित पटाखा फैक्टरी का लाइसेंस वर्ष 2024 में ही रद्द कर दिया गया था। इसके बावजूद फैक्टरी का संचालन कैसे जारी रहा, इसकी जांच की जाएगी।
विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि फैक्टरी की इमारत पूरी तरह नष्ट हो गई। आसपास के छह मकान भी क्षतिग्रस्त हुए हैं। हादसे के बाद प्रशासन ने फैक्टरी और गोदाम से जुड़े दस्तावेजों की जांच शुरू करने की तैयारी की है।
दो किलोमीटर दूर तक सुनाई दिए धमाके
हादसा सोमवार दोपहर करीब 12 बजे पिपरी थाना क्षेत्र के मनौरी बाजार में हुआ। फैक्टरी में आग लगने के बाद वहां रखे पटाखों में लगातार धमाके होने लगे। धमाकों की आवाज करीब दो किलोमीटर दूर तक सुनाई दी। कुछ ही देर में पूरे इलाके में धुएं का गुबार छा गया और अफरा-तफरी मच गई।
विस्फोट की चपेट में आने से कई मकान भी क्षतिग्रस्त हुए। हादसे में 11 लोगों की मौत हुई है, जबकि करीब पांच लोग घायल बताए गए हैं। इनमें तीन की हालत गंभीर है और उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया है। झुलसे लोगों को प्रयागराज के एसआरएन अस्पताल भेजा गया।
एंबुलेंस नहीं मिली तो चारपाई पर अस्पताल ले गए घायल
हादसे के बाद घायलों को अस्पताल पहुंचाने में भी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। रिपोर्ट के अनुसार, करीब एक घंटे तक एंबुलेंस का इंतजार किया गया। एंबुलेंस नहीं मिलने पर घायलों को पिकअप वाहन से चारपाई पर लादकर प्रयागराज के एसआरएन अस्पताल ले जाया गया।
पिकअप से चार घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया। इनमें 13 वर्षीय प्रवीण सिंह और पांच वर्षीय प्रांजली की अस्पताल पहुंचने से पहले ही मौत हो गई।
हादसे के बाद अवैध पटाखा कारोबार पर फिर सवाल
कौशांबी और प्रयागराज में अवैध पटाखा निर्माण और भंडारण के खिलाफ पहले भी कार्रवाई होती रही है। इसके बावजूद रिहायशी इलाकों में इस तरह का कारोबार पूरी तरह बंद नहीं हो सका है।
रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2024 में कौशांबी के भरवारी में भी पटाखा फैक्टरी में विस्फोट हुआ था, जिसमें सात लोगों की मौत हुई थी। दो साल के भीतर दोबारा हुए इस तरह के हादसे ने अवैध पटाखा कारोबार की निगरानी और कार्रवाई की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े किए हैं।
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