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एशियन पैरा गेम्स में प्रणव सूरमा का कमाल, डिस्कस थ्रो में गोल्ड जीतने के बाद विराट कोहली का किया जिक्र

एशियन पैरा गेम्स में भारतीय पैरा एथलीट प्रणव सूरमा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए डिस्कस थ्रो की एफ51/52/53 संयुक्त स्पर्धा में स्वर्ण पदक अपने नाम किया। उन्होंने 11.66 मीटर की दूरी तक चक्का फेंककर नया एशियाई रिकॉर्ड बनाया। इसी स्पर्धा में भारत के राम रतन सिंह ने रजत पदक जीतकर देश की झोली में एक और पदक डाला। गोल्ड जीतने के बाद प्रणव सूरमा ने भारतीय क्रिकेटर विराट कोहली का जिक्र करते हुए एक दिलचस्प उदाहरण दिया।

पहली बड़ी प्रतियोगिता में बनाया एशियाई रिकॉर्ड

32 वर्षीय प्रणव सूरमा ने संयुक्त एफ51/52/53 वर्ग की डिस्कस थ्रो स्पर्धा में अपने चौथे प्रयास में 11.66 मीटर की दूरी हासिल की। इस प्रदर्शन के साथ उन्होंने स्वर्ण पदक जीतने के अलावा नया एशियाई रिकॉर्ड भी कायम किया।

भारत के 31 वर्षीय राम रतन सिंह ने अपने दूसरे प्रयास में 10.35 मीटर की दूरी तक चक्का फेंककर रजत पदक जीता। इस तरह भारतीय खिलाड़ियों ने स्पर्धा में पहले और दूसरे स्थान पर कब्जा जमाया।

गोल्ड जीतने के बाद विराट कोहली का क्यों किया जिक्र?

प्रणव सूरमा ने अपनी जीत के बाद क्रिकेट का उदाहरण देते हुए विराट कोहली का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि क्रिकेट में कई बार बल्लेबाज भी गेंदबाजी करते हैं और विकेट हासिल कर लेते हैं।

सूरमा ने कहा, “जब हम क्रिकेट खेलते हैं, तो कभी-कभी कोई बल्लेबाज भी गेंदबाजी करता है। विराट कोहली बहुत अच्छी बल्लेबाजी करते हैं, लेकिन लंबे समय बाद जब वह एक ओवर डालते हैं, तो उसमें विकेट भी ले लेते हैं।”

क्लब थ्रो है सूरमा का पसंदीदा इवेंट

प्रणव सूरमा इससे पहले चीन में आयोजित पिछले एशियन पैरा गेम्स में क्लब थ्रो की एफ51 स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीत चुके हैं। क्लब थ्रो उनका पसंदीदा इवेंट है, जबकि डिस्कस थ्रो में वह इस बार हिस्सा ले रहे हैं।

सूरमा ने कहा कि इतने बड़े मंच पर पहली बार डिस्कस थ्रो में प्रतिस्पर्धा करते हुए अपना व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना और एशियाई रिकॉर्ड तोड़ना उनके लिए बेहद खुशी की बात है। इस बार वह क्लब थ्रो और डिस्कस थ्रो, दोनों स्पर्धाओं में भाग ले रहे हैं।

क्लब थ्रो और डिस्कस थ्रो की तकनीक में अंतर

प्रणव सूरमा के मुताबिक, क्लब थ्रो और डिस्कस थ्रो तकनीकी रूप से अलग-अलग स्पर्धाएं हैं। क्लब थ्रो में क्लब पर गोंद लगाकर उसे उंगलियों से पकड़ना होता है, जबकि डिस्कस थ्रो में हाथ पर गोंद लगाया जाता है।

उन्होंने बताया कि गोंद लगाने, उपकरण को सही तरीके से पकड़ने और उचित तकनीक के साथ उसे छोड़ने की प्रक्रिया चुनौतीपूर्ण होती है। इसलिए एक स्पर्धा से दूसरी स्पर्धा में खुद को ढालने के लिए विशेष अभ्यास की जरूरत पड़ती है। सूरमा ने कहा कि डिस्कस थ्रो उनके लिए नया इवेंट है और इसके लिए उन्होंने पिछले एक साल से लगातार अभ्यास किया है।

ज्यादा दूरी का थ्रो करने के बाद भी ईरानी खिलाड़ी को मिला कांस्य

स्पर्धा में ईरान के अलीरेजा हेमामी ने अपने चौथे प्रयास में 20.20 मीटर की दूरी हासिल की और कांस्य पदक जीता। उनका थ्रो दूरी के लिहाज से प्रणव सूरमा और राम रतन सिंह के प्रदर्शन से अधिक था, लेकिन संयुक्त वर्ग में पदकों का निर्धारण केवल थ्रो की दूरी से नहीं होता।

इस स्पर्धा में रेजा पॉइंट प्रणाली का इस्तेमाल किया जाता है। इसके तहत अलग-अलग दिव्यांगता वर्गों के खिलाड़ियों के प्रदर्शन को उनकी श्रेणी के आधार पर मानकीकृत अंकों में बदला जाता है। इसके बाद अंकों के आधार पर रैंकिंग तय होती है।

क्या है एफ51 वर्ग?

एफ51 वर्ग में ऐसे खिलाड़ी शामिल होते हैं, जिनके धड़, पैरों और हाथों की गतिविधियों में गंभीर सीमाएं होती हैं। इन खिलाड़ियों की बांहों की गतिविधियों पर भी असर पड़ सकता है।

पैरा एथलेटिक्स में एफ51 से एफ57 तक के वर्गों में ऐसे खिलाड़ी बैठकर थ्रो स्पर्धाओं में हिस्सा लेते हैं। इन वर्गों में निचले शरीर से जुड़ी दिव्यांगता, मांसपेशियों की ताकत में कमी, अंगों की कमी और जोड़ों की गति सीमित होने जैसी स्थितियां शामिल हो सकती हैं।

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