सीएम योगी ने लखनऊ में उत्तर प्रदेश कृषि विज्ञान कांग्रेस-2026 का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में उन्होंने वैज्ञानिकों से बातचीत का एक किस्सा सुनाया। सीएम ने बताया- हाल ही में मैं कृषि मौसम वैज्ञानिकों से बात कर रहा था कि खेती के समय अचानक मौसम क्यों बिगड़ गया।
उन्होंने बताया- इसके पीछे की वजह वेस्टर्न डिस्टर्बेंस है। ईरान और पाकिस्तान में जो बवंडर उठा है, हमारे यहां के मौसम बिगड़ने का कारण है। हमने उनसे कहा कि वहां युद्ध से लोग लड़े-मरे लेकिन भारत के अंदर यह क्यों हो रहा है? वैज्ञानिकों ने बताया- यह वेस्टर्न डिस्टर्बेंस का परिणाम है। बादल काफी नीचे हैं और यह ओलावृष्टि का कारण बनेगा, साथ ही असमय बारिश का भी कारण बनेगा।
ये चुनौतियां हमेशा आती रहेंगी, क्योंकि कुछ लोगों की प्रवृत्ति जैसी होती है, प्रकृति भी वहां वैसी ही हो जाती है। वे खुद शांति से नहीं रहते और दूसरों को भी नहीं रहने देते। न खुद करेंगे, न करने देंगे। उसी दुष्प्रवृत्ति का शिकार हमारा अन्नदाता किसान भी हो जाता है। इसलिए हमें देसी पद्धति को विकसित करना पड़ेगा, जिसके बारे में प्रधानमंत्री जी बार-बार कहते हैं।
आक्रांताओं ने खेती पर ही नहीं, बल्कि उद्यमिता पर हमला किया था
सीएम योगी ने कहा- जब भारत का दुनिया की अर्थव्यवस्था में 44-45 फीसदी अधिकार था, तब उसका आधार भारत की कृषि थी। अन्नदाता किसान और कारीगर इसका आधार थे। किसान सिर्फ खेती तक सीमित नही थे, वह कारीगर भी थे, दोनों काम मिलकर होते थे। किसान उत्पादक था और जब कारीगर बनकर कार्य करता था, तो उद्यमी के रूप में भी खुद को स्थापित करता था।
उत्पादक से उद्यमी से बनने की गाथा है- वैदिक काल से भारत में विशेषकर उत्तर प्रदेश की माटी से जुड़ी रही है। आक्रांताओं ने खेती पर ही हमला नहीं किया था, यहां की उद्यमिता पर भी हमला किया। यहां जितने कृषि वैज्ञानिक, शोधार्थी हैं उन्होंने भारत के राष्ट्रगीत वंदेमातरम की गाथा को सुना होगा। यह भारत के आनंदमठ पर आधारित उपन्यास का एक पार्ट है। यह बंगाल की त्रासदी पर आधारित गीत है।
बंगाल में जब अकाल पड़ते थे, लोग भूखे मर रहे थे, वहां के एक जमीदार महेंद्र नाथ के परिवार पर किस प्रकार बीता था, फिर संन्यासी विद्रोह हुआ था, ब्रिटिश औपनिवेशिक काल मे किस प्रकार शोषण होता था, उसकी पूरी गाथा आनंदमठ में समाहित की गई है। भारत के उत्पादक किसान को कर्जदार बना दिया जाता है, तो वह कर्जदाता बनने की गाथा अकाल और त्रासदी के रूप में हम सबको देखने को मिलती है।
पहले चीनी मिलें बंद हो रही थीं, बेची जा रही थीं
योगी ने कहा- सरकार ने आज कृषि,खेती और किसान को एजेंडे का हिस्सा बनाया है। आज हमने गन्ना उत्पादक किसानों को, जिस उत्तर प्रदेश में दस-दस वर्षों तक गन्ना मूल्य का भुगतान नहीं हुआ था, चीनी मिलें बंद हो रही थीं, बेंची जा रही थीं, उसी उत्तरप्रदेश में आज वो शुगर कॉम्प्लेक्स के रूप में काम कर रही हैं।
उत्तर प्रदेश देश के कुल 55 फीसदी गन्ने का उत्पादन कर रहा है। एथेनॉल उत्पादन 41 करोड़ लीटर से बढ़कर लगभग पौने 2 लाख करोड़ लीटर तक पहुंच चुका है। हमने गन्ना किसानों को ही लगभग 2 लाख 90 हजार करोड़ रुपए से अधिक की राशि डीबीटी के माध्यम से दे चुके हैं।
यूपी में जो 122 चीनी मिलें चल रही हैं, उनमें से 106-107 चीनी मिल ऐसी हैं जो छठे-सातवें दिन गन्ना मूल्य का भुगतान कर दे रही हैं, यानी गन्ना मूल्य के भुगतान में लेट नहीं, ये सब कुछ आपस में जुड़ा है, लोग नई-नई चीनी मिल लगाने के लिए आगे आ रहे हैं।
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