दिल्ली में पुलिस और वकीलों के बीच हुए विवाद का मामला लगातार चर्चा में बना हुआ है। पुलिस मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन का नेतृत्व करने वाले एसीपी मनस्वी वशिष्ठ को सोशल मीडिया पर ट्रोल किया जा रहा है। उन्हें ‘कॉकरोच’ कहकर संबोधित किए जाने वाली पोस्ट वायरल होने के बाद मामला और चर्चा में आ गया।
इस पूरे विवाद के बीच शाहदरा थाने के एसएचओ अरुण कुमार की गैरमौजूदगी भी सवालों के घेरे में रही। बताया गया कि पुलिस-वकील विवाद की शुरुआत शाहदरा थानाध्यक्ष के स्तर से हुई थी और वह पुलिसकर्मियों के प्रदर्शन में शामिल नहीं हुए।
एसीपी के निलंबन की पोस्ट पर दिल्ली पुलिस का फैक्ट चेक
सोशल मीडिया पर मंगलवार सुबह एक पोस्ट साझा की गई, जिसमें दावा किया गया कि प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे एसीपी मनस्वी वशिष्ठ को निलंबित कर दिया गया है। पोस्ट के साथ दो वीडियो भी साझा किए गए थे। इनमें से एक वीडियो जयपुर का बताया गया। दिल्ली पुलिस ने फैक्ट चेक करते हुए जयपुर से जुड़े वीडियो को फर्जी बताया।
पुलिस आयुक्त ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ की बैठक
पुलिसकर्मियों के प्रदर्शन और उनकी नाराजगी को देखते हुए दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार ने मंगलवार दोपहर वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे नियमित रूप से पुलिसकर्मियों के बीच जाएं और उनकी समस्याएं सुनें। इसके लिए हर सप्ताह संपर्क सभा आयोजित करने को कहा गया।
‘जब पुलिस स्टेशन ही सुरक्षित नहीं तो दूसरी जगह कैसे सुरक्षित होगी’
प्रदर्शन के दौरान एसीपी मनस्वी वशिष्ठ ने कहा कि पुलिसकर्मियों का आह्वान स्वाभाविक है और वह भी इसमें शामिल हुए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस को गुंडागर्दी का सामना करना पड़ रहा है। पुलिस स्टेशनों के अंदर सुरक्षा संबंधी समस्याएं पैदा हो रही हैं। उन्होंने कहा कि अगर पुलिस स्टेशन ही सुरक्षित नहीं हैं तो कोई भी जगह सुरक्षित नहीं मानी जा सकती।
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