भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अक्टूबर 2026 का मासिक बुलेटिन जारी कर दिया है। रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक आपूर्ति शृंखला में आ रही बाधाओं के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूती बनाए हुए है। बुलेटिन में बैंकिंग सेक्टर, कर्ज दरों, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC) और महंगाई से जुड़े कई अहम पहलुओं का विश्लेषण किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, मौद्रिक नीति में की गई कटौती का लाभ कर्ज लेने वालों तक पहुंचा है। वहीं, NBFC सेक्टर ने भी दोहरे अंकों में ऋण वृद्धि दर्ज की है।
वैश्विक चुनौतियों के बावजूद अर्थव्यवस्था मजबूत
RBI बुलेटिन के ‘स्टेट ऑफ द इकोनॉमी’ अध्ययन में बताया गया है कि पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव और आपूर्ति शृंखला में व्यवधान के कारण वैश्विक स्तर पर महंगाई का दबाव बढ़ा है। इसके बावजूद भारत में उद्योग और सेवा क्षेत्र से जुड़े प्रमुख आर्थिक संकेतक मजबूती की ओर इशारा कर रहे हैं।
रिपोर्ट के अनुसार, सितंबर में खाद्य पदार्थों, ईंधन और कोर महंगाई के घटकों में वृद्धि के चलते खुदरा महंगाई दर में मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई। हालांकि, वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही में वस्तुओं के निर्यात में दोहरे अंकों की वृद्धि हुई, जिससे व्यापार घाटे को कम करने में मदद मिली।
इसके अलावा, अगस्त के दौरान प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI), बाहरी वाणिज्यिक उधारी (ECB) और विदेश से भेजे जाने वाले धन यानी रेमिटेंस के प्रवाह में मजबूती दर्ज की गई। विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करने में FCNR (B) स्वैप विंडो के तहत आए प्रवाह की भी भूमिका रही।
बैंकों की कर्ज दरों में 93 बेसिस पॉइंट की गिरावट
RBI बुलेटिन में प्रकाशित एक शोध अध्ययन के अनुसार, फरवरी 2025 से मार्च 2026 के बीच नीतिगत रेपो दर में कुल 125 बेसिस पॉइंट की कटौती की गई। इस दौरान अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों की नई कर्ज दरों यानी भारित औसत ऋण दर (WALR) में 93 बेसिस पॉइंट की गिरावट दर्ज की गई।
अध्ययन के मुताबिक, कर्ज दरों में आई कुल गिरावट में 80 बेसिस पॉइंट का योगदान सीधे ब्याज दरों में बदलाव का रहा, जबकि 13 बेसिस पॉइंट की गिरावट क्रेडिट संरचना में हुए बदलाव से जुड़ी थी।
इसका मतलब है कि कर्ज दरों में बदलाव केवल रेपो रेट में कटौती के असर को नहीं दर्शाता, बल्कि बैंकों और विभिन्न क्षेत्रों में कर्ज के वितरण में आए बदलाव भी इसमें भूमिका निभाते हैं।
NBFC सेक्टर में दोहरे अंकों की क्रेडिट ग्रोथ
RBI की रिपोर्ट में गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC) के प्रदर्शन को भी प्रमुखता दी गई है। अध्ययन के अनुसार, दिसंबर 2025 के अंत तक NBFC सेक्टर ने सालाना आधार पर दोहरे अंकों में क्रेडिट ग्रोथ बनाए रखी।
इसके साथ ही, पिछले कुछ वर्षों में इस क्षेत्र के गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (NPA) अनुपात में लगातार गिरावट देखी गई है। इससे NBFC कंपनियों की परिसंपत्ति गुणवत्ता में सुधार के संकेत मिले हैं।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि NBFC कंपनियां ग्राहकों से जुड़ी सेवाओं, वित्तीय अनुप्रयोगों, डिजिटल बुनियादी ढांचे और डेटा एनालिटिक्स में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा रही हैं।
राज्यों की आर्थिक गतिविधियों का आकलन करने के लिए डिजिटल मॉडल
RBI बुलेटिन में राज्यों की आर्थिक गतिविधियों का अनुमान लगाने के लिए एक नए मॉडल पर आधारित अध्ययन भी शामिल है। इसमें रात के समय उपग्रहों से दिखाई देने वाली रोशनी और Google Trends के डिजिटल सर्च डेटा का इस्तेमाल किया गया है।
इस मॉडल के जरिए महाराष्ट्र, कर्नाटक और गुजरात जैसे राज्यों में सकल राज्य मूल्य वर्धित (GSVA) गतिविधियों का अनुमान लगाने का प्रयास किया गया है। इसका उद्देश्य आधिकारिक आर्थिक आंकड़े जारी होने में लगने वाले समय के बीच आर्थिक गतिविधियों की स्थिति का अधिक समयानुकूल आकलन करना है।
RBI बुलेटिन के मुख्य संकेत क्या हैं?
अक्टूबर 2026 के बुलेटिन से तीन प्रमुख बातें सामने आती हैं। पहली, वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था में मजबूती के संकेत बने हुए हैं। दूसरी, रेपो दर में कटौती का असर बैंकों की नई कर्ज दरों में दिखाई दिया है। तीसरी, NBFC सेक्टर में ऋण वृद्धि और परिसंपत्ति गुणवत्ता में सुधार दर्ज किया गया है।
कुल मिलाकर, RBI का यह बुलेटिन भारतीय अर्थव्यवस्था, बैंकिंग व्यवस्था और NBFC सेक्टर की स्थिति का विस्तृत आकलन प्रस्तुत करता है। हालांकि, वैश्विक तनाव, महंगाई और आपूर्ति शृंखला से जुड़ी चुनौतियां आगे भी आर्थिक गतिविधियों के लिए महत्वपूर्ण बनी रहेंगी।
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