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उत्तराखंड में बीमा एजेंट बनने के नियम बदले: सरकारी कर्मचारियों के परिवारों पर लागू होगा नया प्रावधान, जानें क्या हुआ बदलाव

उत्तराखंड सरकार ने राज्य गठन के बाद लागू सरकारी कर्मचारी आचरण नियमावली में करीब 24 साल बाद संशोधन किया है। कार्मिक विभाग ने उत्तराखंड राज्य कर्मचारी आचरण संशोधन नियमावली-2026 लागू कर दी है। नए नियमों के तहत सरकारी कर्मचारियों के परिवार से जुड़े बीमा एजेंसी के काम, संपत्ति खरीदने और संपत्ति का ब्योरा देने के प्रावधानों में बदलाव किया गया है।

अपर सचिव कार्मिक गिरधारी सिंह रावत की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, नियमावली के नियम-15 में संशोधन किया गया है। इससे सरकारी कर्मचारियों को चल और अचल संपत्ति से जुड़े लेन-देन की जानकारी देने के लिए नए प्रावधानों का पालन करना होगा।

सरकारी कर्मचारी के जिले में आश्रित नहीं बन सकेंगे बीमा एजेंट

नई नियमावली के तहत सरकारी कर्मचारी के जिले में उसकी पत्नी या आश्रित व्यक्ति बीमा एजेंट के रूप में काम नहीं कर सकेंगे। इस प्रावधान का उद्देश्य सरकारी सेवा से जुड़े हितों में टकराव की आशंका को रोकना है।

अचल संपत्ति खरीदने के नियमों में बदलाव

सरकारी कर्मचारियों को अब अपने या परिवार के नाम पर पट्टे, रेहन, भेंट या अन्य माध्यम से अचल संपत्ति प्राप्त करने पर इसकी सूचना अपने नियुक्ति प्राधिकारी को देनी होगी। पहले इसके लिए पूर्व अनुमति लेने का प्रावधान था।

हालांकि, यदि अचल संपत्ति ऐसे व्यक्ति से प्राप्त की जाती है, जिसका सरकार के साथ लेन-देन का संबंध है, तो कर्मचारी को पहले संबंधित नियुक्ति प्राधिकारी से अनुमति लेनी होगी।

चल संपत्ति खरीदने पर भी देना होगा ब्योरा

नई व्यवस्था के तहत यदि कोई सरकारी कर्मचारी दो महीने के मूल वेतन से अधिक कीमत की चल संपत्ति खरीदता है, तो उसे एक महीने के भीतर इसकी सूचना नियुक्ति प्राधिकारी को देनी होगी। इसमें मोबाइल, टीवी और अन्य महंगी वस्तुएं शामिल हो सकती हैं।

यदि ऐसी संपत्ति किसी ऐसे व्यक्ति से खरीदी जाती है, जिसका सरकार के साथ लेन-देन है, तो इसके लिए पहले अनुमति लेना अनिवार्य होगा। पुराने नियम में एक महीने के वेतन या 5,000 रुपये, जो भी कम हो, की सीमा निर्धारित थी। अब इसे बदलकर दो महीने के मूल वेतन के आधार पर तय किया गया है।

सरकारी कर्मचारियों को नियमित देना होगा संपत्ति का विवरण

संशोधित नियमावली में संपत्ति का ब्योरा देने की समयसीमा भी निर्धारित की गई है। समूह-क, ख और ग के अधिकारियों व कर्मचारियों को प्रथम नियुक्ति के समय के अलावा हर वर्ष अपनी संपत्ति का विवरण नियुक्ति प्राधिकारी को देना होगा। वहीं, समूह-घ के कर्मचारियों को प्रत्येक पांच वर्ष में संपत्ति का ब्योरा प्रस्तुत करना होगा।

कर्मचारी आचरण नियमावली में 24 साल बाद संशोधन

उत्तराखंड में राज्य गठन के बाद वर्ष 2002 की कर्मचारी आचरण नियमावली लागू थी। अब सरकार ने वर्ष 2026 में इसमें संशोधन कर नई व्यवस्था लागू की है। नए प्रावधानों के तहत संपत्ति की खरीद, सूचना देने और सरकारी कर्मचारियों के परिवार से जुड़े कुछ व्यावसायिक कार्यों को लेकर नियमों में बदलाव किया गया है। सरकारी कर्मचारियों को अब इन संशोधित प्रावधानों के अनुसार कार्य करना होगा।

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