Sunday , September 6 2026
Breaking News

यूपी में मस्जिद ध्वस्तीकरण पर ओवैसी का सवाल, बोले- पुराने दस्तावेज होने के बाद भी क्यों हुई कार्रवाई?

सहारनपुर कलेक्ट्रेट परिसर में मौजूद मस्जिद को शनिवार सुबह करीब पांच बजे ढहाए जाने के बाद एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने सरकार की कार्रवाई पर सवाल उठाए। ओवैसी ने दावा किया कि मस्जिद कलेक्ट्रेट से पहले की है और मस्जिद कमेटी ने अदालत में 1911 के दस्तावेज भी पेश किए थे। उन्होंने धार्मिक आजादी और संवैधानिक अधिकारों का हवाला देते हुए कार्रवाई पर सवाल खड़े किए।

मस्जिद गिराए जाने पर ओवैसी ने उठाए सवाल

सहारनपुर कलेक्ट्रेट में मौजूद मस्जिद को शनिवार सुबह करीब पांच बजे ध्वस्त किए जाने के बाद असदुद्दीन ओवैसी ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सवाल किया कि क्या अब मुसलमानों के लिए धार्मिक आजादी का संवैधानिक अधिकार भी नहीं बचा है।

ओवैसी ने कहा कि इबादतगाहों पर बार-बार कमजोर और मनगढ़ंत वजहों के नाम पर बुलडोजर क्यों चलाया जाता है। उन्होंने धार्मिक स्थलों से जुड़े मामलों में संवैधानिक अधिकारों और धार्मिक स्वतंत्रता को ध्यान में रखने की बात कही।

1911 के दस्तावेजों का किया जिक्र

ओवैसी ने कहा कि मस्जिद कमेटी की ओर से अदालत में 1911 के दस्तावेज पेश किए गए थे। उनके मुताबिक, इन दस्तावेजों के जरिए यह साबित करने की कोशिश की गई थी कि मस्जिद कलेक्ट्रेट से पहले से मौजूद थी।

उन्होंने दावा किया कि वहां एक सदी से अधिक समय से लगातार नमाज होती रही है। ओवैसी के मुताबिक, यह कोई हाल में बनाई गई इमारत नहीं थी, बल्कि लंबे समय से इबादतगाह के तौर पर इस्तेमाल होती रही है।

वक्फ बाय यूजर और लिमिटेशन एक्ट का हवाला

ओवैसी ने अपने बयान में ‘वक्फ बाय यूजर’ का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि किसी स्थान का लंबे समय तक इबादतगाह के तौर पर इस्तेमाल होना कानूनी रूप से महत्वपूर्ण हो सकता है।

उन्होंने लिमिटेशन एक्ट का हवाला देते हुए जमीन पर सरकार के दावे पर भी सवाल उठाया। ओवैसी ने कहा कि जब किसी जमीन पर एक सदी से अधिक समय से खुले तौर पर और लगातार कब्जा रहा हो, तो सरकार अचानक उसे नजरअंदाज कर यह नहीं कह सकती कि जमीन अब उसकी है। उन्होंने लंबे समय की काबिजी को देखते हुए प्रतिकूल कब्जे के सवाल का भी जिक्र किया।

‘मस्जिद पहले थी, कलेक्ट्रेट बाद में आया’

ओवैसी ने कहा, ‘मस्जिद पहले थी, कलेक्ट्रेट बाद में आया।’ उन्होंने कहा कि कुछ लोगों को मस्जिद दिखाई देने पर परेशानी हो सकती है, लेकिन यह उनका मसला है।

उन्होंने आरोप लगाया कि किसी की खुन्नस मिटाने के लिए मस्जिद पर बुलडोजर नहीं चलाया जा सकता। ओवैसी ने कहा कि धार्मिक आजादी किसी की रहम-ओ-करम पर निर्भर नहीं है।

‘हमारी इबादतगाहों पर बुलडोजर क्यों?’

एआईएमआईएम प्रमुख ने सवाल किया कि अगर किसी धार्मिक स्थल को लेकर विवाद है तो बार-बार इबादतगाहों पर बुलडोजर कार्रवाई क्यों की जा रही है।

उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में संवैधानिक अधिकारों और धार्मिक स्वतंत्रता को ध्यान में रखा जाना चाहिए। ओवैसी के मुताबिक, सहारनपुर की मस्जिद का मामला सिर्फ एक इमारत का नहीं, बल्कि धार्मिक आजादी और संवैधानिक अधिकारों से जुड़े सवालों का भी है।

Check Also

11 साल में 13 बार मेट्रो की सवारी कर चुके हैं पीएम मोदी, 2023 के बाद फिर किया सफर

उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर तैयारियां तेज होने वाली हैं। चुनाव में करीब ...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *