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अमेरिका से व्यापार समझौते पर पीयूष गोयल का बड़ा बयान, टैरिफ में भारत को तरजीही दर मिलने के संकेत

भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) को लेकर बातचीत महत्वपूर्ण दौर में है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि समझौते को अंतिम रूप तभी दिया जाएगा, जब अमेरिका भारत को उसके प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में तरजीही टैरिफ दरों की पेशकश करेगा।

नई दिल्ली में मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) का लाभ उठाने को लेकर आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला में गोयल ने भारत की व्यापार रणनीति और वैश्विक बाजारों में भारतीय निर्यातकों के लिए बढ़ते अवसरों पर बात की।

तरजीही दर मिलने के बाद होगा समझौता

पीयूष गोयल के मुताबिक, भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की घोषणा तब की जाएगी, जब अमेरिका भारतीय उत्पादों को प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में बेहतर टैरिफ दर उपलब्ध कराने की पेशकश करेगा।

उन्होंने संकेत दिया कि भारत अपने निर्यातकों के लिए ऐसी व्यापारिक परिस्थितियां चाहता है, जिससे वे अमेरिकी बाजार में अन्य देशों के मुकाबले प्रतिस्पर्धी स्थिति में रह सकें।

भारत और अमेरिका ने इस साल फरवरी में व्यापार समझौते के पहले चरण की रूपरेखा तय की थी। हालांकि, इसके बाद अमेरिकी टैरिफ व्यवस्था में बदलाव के कारण दोनों देशों को बातचीत को आगे बढ़ाने के लिए फिर से चर्चा करनी पड़ी।

अमेरिका ने लगाया 10 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ

खबर के अनुसार, अमेरिका ने 24 जुलाई से भारत समेत कई देशों पर 10 फीसदी अतिरिक्त टैरिफ लगाया है। इसी मुद्दे को सुलझाने के लिए भारत और अमेरिका के बीच बातचीत जारी है।

पीयूष गोयल सितंबर के अंत में अमेरिका के मिल्वौकी शहर का दौरा करेंगे। वहां 30 सितंबर से शुरू होने वाली दो दिवसीय जी-20 व्यापार मंत्री स्तरीय बैठक में वह हिस्सा लेंगे। इस दौरान अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) जेमिसन ग्रीर के साथ द्विपक्षीय बातचीत भी प्रस्तावित है।

भारतीय निर्यातकों को मिल सकता है फायदा

अमेरिका भारतीय उत्पादों के लिए प्रमुख निर्यात बाजारों में शामिल है। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत ने अमेरिका को करीब 87 अरब डॉलर मूल्य की वस्तुओं का निर्यात किया था।

अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पादों को वियतनाम, बांग्लादेश, थाईलैंड, कंबोडिया, इंडोनेशिया, मलेशिया और श्रीलंका जैसे देशों से प्रतिस्पर्धा करनी पड़ती है।

ऐसे में यदि भारत को अमेरिका की ओर से प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में तरजीही टैरिफ दर मिलती है तो भारतीय उत्पादों को अमेरिकी बाजार में कीमत के स्तर पर फायदा मिल सकता है। इससे निर्यात बढ़ने की संभावनाएं भी मजबूत हो सकती हैं।

9 सक्रिय मुक्त व्यापार समझौते

पीयूष गोयल ने भारत के मौजूदा मुक्त व्यापार समझौतों का भी उल्लेख किया। उनके अनुसार, भारत के पास फिलहाल नौ सक्रिय एफटीए हैं। ये समझौते करीब 60 ट्रिलियन डॉलर की सामूहिक जीडीपी वाली अर्थव्यवस्थाओं को कवर करते हैं।

इन व्यापार समझौतों के जरिए भारत को वैश्विक व्यापार के करीब दो-तिहाई हिस्से तक तरजीही पहुंच हासिल है। सरकार आने वाले महीनों और वर्षों में कनाडा, मैक्सिको, चिली, मर्कोसुर, दक्षिण अफ्रीकी सीमा शुल्क संघ (SACU), खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) और इस्राइल के साथ भी नए व्यापार समझौते करने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

इसके अलावा आसियान, जापान और दक्षिण कोरिया के साथ मौजूदा व्यापार समझौतों की समीक्षा भी की जा रही है। सरकार का लक्ष्य इन प्रयासों के जरिए भारतीय निर्यातकों की वैश्विक बाजारों तक पहुंच को और मजबूत करना है।

1 ट्रिलियन डॉलर निर्यात का लक्ष्य

सरकार ने मौजूदा वर्ष के लिए भारत के कुल निर्यात को 1 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। खबर के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष के पहले चार महीनों यानी अप्रैल से जुलाई के दौरान भारत का निर्यात 317 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह आंकड़ा 280 अरब डॉलर था।

सरकार का दीर्घकालिक लक्ष्य वर्ष 2030 तक देश के निर्यात को 2 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंचाना है। इसके लिए निर्यातकों को आगामी 100 ‘भव्य’ (BHAVYA) औद्योगिक पार्कों में प्राथमिकता के आधार पर सहायता और प्लग-एंड-प्ले सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है।

निर्यातकों के सामने चुनौतियां भी

वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने कहा कि व्यापार समझौतों से मिलने वाले अवसरों का लाभ उठाने के लिए भारत को तेजी से कदम उठाने होंगे। उन्होंने चेताया कि प्रतिस्पर्धी देश भी समय के साथ इसी तरह के व्यापार समझौते कर सकते हैं।

उन्होंने अगले पांच से दस वर्षों में मजबूत और नई आपूर्ति शृंखलाएं विकसित करने की जरूरत पर जोर दिया। साथ ही यूरोपीय संघ और ब्रिटेन जैसे विकसित बाजारों में ऊंचे गुणवत्ता मानकों को पूरा करना भी भारतीय निर्यातकों के लिए महत्वपूर्ण चुनौती होगी।

कुल मिलाकर, भारत-अमेरिका व्यापार समझौते में टैरिफ दरें अहम मुद्दा बनी हुई हैं। भारत की कोशिश है कि अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पादों को प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले बेहतर शर्तें मिलें। अब बातचीत के अगले दौर और सितंबर के अंत में प्रस्तावित बैठक के बाद समझौते की दिशा और अधिक स्पष्ट होने की उम्मीद है।

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