कांग्रेस ने केंद्र सरकार की ‘समुद्र मंथन’ राष्ट्रीय ऑफशोर खोज योजना पर सवाल उठाए हैं। पार्टी ने आरोप लगाया कि योजना से अदाणी समूह की कंपनी को फायदा पहुंच सकता है। कांग्रेस ने योजना रद्द करने या इसके लिए मंजूर 84,084 करोड़ रुपये ONGC को देने की मांग की है।
कांग्रेस ने ‘समुद्र मंथन’ योजना पर उठाए सवाल
कांग्रेस ने सोमवार को ‘समुद्र मंथन’ राष्ट्रीय ऑफशोर खोज योजना को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधा। पार्टी का आरोप है कि इस योजना के जरिए अदाणी समूह की कंपनी वेल स्पन एक्सप्लोरेशन लिमिटेड (AWEL) को फायदा पहुंचाया जा सकता है।
कांग्रेस प्रवक्ता शक्तिसिंह गोहिल ने दावा किया कि योजना के पहले चरण के लिए 84,084 करोड़ रुपये का बजट मंजूर किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार खोज और अन्वेषण से जुड़े खर्च में 50 प्रतिशत तक की आर्थिक मदद देगी।
सरकार के मुताबिक, योजना का उद्देश्य भारत की ऑफशोर ऊर्जा क्षमता का इस्तेमाल करना, ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करना, घरेलू तेल-गैस की खोज और उत्पादन बढ़ाना तथा हाइड्रोकार्बन क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देना है। सरकार या अदाणी समूह की ओर से कांग्रेस के आरोपों पर तत्काल प्रतिक्रिया नहीं आई है।
AWEL में अदाणी की कितनी हिस्सेदारी?
कांग्रेस नेता ने दावा किया कि वेल स्पन एक्सप्लोरेशन लिमिटेड में अदाणी की 65 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जबकि बाकी 35 प्रतिशत हिस्सेदारी वेलस्पन ग्रुप के पास है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि योजना के तहत गहरे समुद्र में ड्रिलिंग, सिस्मिक सर्वे और ऑफशोर इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे कामों की लागत का 50 प्रतिशत सरकार वहन करेगी।
कांग्रेस ने ONGC को पूरी राशि देने की मांग की
गोहिल ने कहा कि गहरे समुद्र में तेल और गैस की खोज काफी महंगी है। उन्होंने दावा किया कि एक कुएं की खोज पर औसतन 1,100 करोड़ रुपये से अधिक खर्च हो सकता है।
कांग्रेस ने सवाल उठाया कि इस योजना में सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी ONGC को मुख्य भूमिका क्यों नहीं दी गई। पार्टी की मांग है कि ‘समुद्र मंथन’ योजना को रद्द किया जाए या इसके लिए मंजूर 84,084 करोड़ रुपये ONGC को दिए जाएं, ताकि तेल-गैस की खोज के साथ रोजगार के अवसर भी बढ़ सकें।
सरकार ने योजना को बताया ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में कदम
केंद्रीय मंत्रिमंडल ने ‘समुद्र मंथन’ यानी राष्ट्रीय ऑफशोर खोज योजना को मंजूरी दी है। यह पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय की केंद्रीय योजना है और इसे वित्त वर्ष 2030-31 तक लागू किया जाना है। इसके लिए 84,084 करोड़ रुपये का बजट मंजूर किया गया है।
सरकार का कहना है कि योजना का उद्देश्य भारत की विशाल ऑफशोर ऊर्जा क्षमता का इस्तेमाल कर ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करना, घरेलू तेल और गैस की खोज एवं उत्पादन में तेजी लाना और तकनीकी क्षमता को बढ़ावा देना है।
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