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अगस्त में छात्र आंदोलनों ने खींचा ध्यान, दीक्षांत समारोह से मानसिक स्वास्थ्य तक क्या रहे मुद्दे?

अगस्त 2026 में देश के कई बड़े उच्च शिक्षण संस्थानों में छात्रों ने अलग-अलग मुद्दों को लेकर प्रदर्शन किए। नालसार, एनएलएसआईयू, आईआईटी दिल्ली, जामिया और आईआईएसईआर पुणे में छात्र आंदोलन चर्चा में रहे।

अगस्त में कई कैंपस में हुआ विरोध

जुलाई में नीट-यूजी 2026 प्रश्नपत्र लीक के विरोध के बाद अगस्त में भी छात्र आंदोलनों का सिलसिला जारी रहा। देश के कई प्रतिष्ठित संस्थानों में छात्रों ने दीक्षांत समारोह, प्रवेश प्रक्रिया, परीक्षा परिणाम, छात्र कल्याण, मानसिक स्वास्थ्य, छात्रावास के नियम और अनुशासनात्मक कार्रवाई जैसे मुद्दों को लेकर आवाज उठाई।

नालसार में सीजेआई की मौजूदगी का विरोध

हैदराबाद स्थित नालसार विधि विश्वविद्यालय में 400 से अधिक छात्रों ने दीक्षांत समारोह में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की प्रस्तावित मौजूदगी का विरोध किया। छात्रों ने यह आपत्ति जंतर-मंतर से निकाले गए ‘चलो संसद’ मार्च के दौरान छात्रों के साथ कथित पुलिस ज्यादती से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से इनकार के संदर्भ में जताई थी। बाद में सीजेआई ने स्पष्ट किया कि उन्होंने नालसार का निमंत्रण स्वीकार नहीं किया था।

एनएलएसआईयू में भी उठा मामला

बंगलूरू स्थित राष्ट्रीय विधि विद्यालय के 700 से अधिक वर्तमान और पूर्व छात्रों ने सीजेआई और भारतीय विधिज्ञ परिषद के अध्यक्ष की प्रस्तावित मौजूदगी का विरोध किया। छात्रों ने नालसार के 2026 बैच के स्नातकों के नामांकन को लेकर जारी और बाद में वापस लिए गए निर्देश पर माफी की मांग भी की। इसके बाद विश्वविद्यालय ने 2026 बैच का वार्षिक दीक्षांत समारोह रद्द कर दिया।

आईआईटी दिल्ली में छात्र की मौत के बाद प्रदर्शन

आईआईटी दिल्ली में 31 वर्षीय एमएससी छात्र की मौत के बाद छात्रों ने विरोध प्रदर्शन किया। उनकी मांगों में मामले की स्वतंत्र जांच, संस्थान के अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई और परिवार के लिए मुआवजा शामिल था। मामले की जांच के लिए गठित बाहरी समिति में बाद में बदलाव किया गया और दिल्ली उच्च न्यायालय की सेवानिवृत्त न्यायाधीश मुक्ता गुप्ता को अध्यक्ष बनाया गया।

जामिया में परीक्षा और प्रवेश प्रक्रिया पर सवाल

जामिया मिल्लिया इस्लामिया में छात्रों ने अनिश्चितकालीन धरना दिया। उनकी प्रमुख मांगों में परीक्षा परिणाम में पारदर्शिता, प्रवेश प्रक्रिया की समीक्षा, कथित अनियमितताओं की जांच और प्रशासन से स्पष्टता शामिल थी। प्रदर्शन में शामिल चार छात्रों को विश्वविद्यालय ने निलंबित कर परिसर में प्रवेश पर रोक लगा दी।

आईआईएसईआर पुणे में मानसिक स्वास्थ्य का मुद्दा

पुणे स्थित आईआईएसईआर में छात्रों ने मानसिक स्वास्थ्य नीतियों, छात्रावास से जुड़े प्रतिबंधों और अनुशासनात्मक कार्रवाई के विरोध में अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया। छात्र परिषद के महासचिव राज बागवे का निलंबन वापस लेने की मांग भी आंदोलन का हिस्सा रही।

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