उत्तराखंड के चमोली जिले में गुरुवार शाम निर्माणाधीन विष्णुगाड-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना की टेल रेस टनल (TRT) में बड़ा हादसा हो गया। सरिया वेल्डिंग के दौरान टनल के बाहर हुए भूस्खलन के बाद भारी मात्रा में पानी, पत्थर और मलबा सुरंग के अंदर आ गया। इसकी चपेट में कई मजदूर आ गए। हादसे में तीन मजदूरों की मौत की सूचना है।
हादसा शाम करीब 6:10 बजे हुआ। जिस जगह मजदूर काम कर रहे थे, उससे लगभग 150 मीटर दूर भूस्खलन हुआ। इसके बाद पानी और मलबा तेजी से टनल के अंदर पहुंच गया, जिससे वहां काम कर रहे मजदूर फंस गए।
13 घायल मजदूरों को निकाला गया
घटना की सूचना मिलते ही जिला प्रशासन, पुलिस, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ, आईटीबीपी, सेना और अन्य राहत-बचाव दल मौके पर पहुंचे। करीब रात नौ बजे तक 13 मजदूरों को घायल अवस्था में टनल से बाहर निकालकर जिला अस्पताल गोपेश्वर भेजा गया। वहीं, कुछ मजदूरों के अब भी मलबे में दबे होने की आशंका है।
रेस्क्यू टीमों की ओर से टनल में फंसे मजदूरों तक पहुंचने के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है। प्रशासन ने बचाव कार्य में सभी उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल करने के निर्देश दिए हैं।
मुख्यमंत्री ने दिए युद्धस्तर पर रेस्क्यू के निर्देश
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हादसे पर चिंता जताते हुए राहत और बचाव कार्य युद्धस्तर पर चलाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता टनल में फंसे सभी लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना है। मुख्यमंत्री ने वरिष्ठ अधिकारियों से लगातार स्थिति की जानकारी लेने और सभी संबंधित एजेंसियों के बीच समन्वय बनाए रखने के निर्देश दिए हैं।
क्या है टीआरटी?
टेल रेस टनल यानी TRT जल विद्युत परियोजना की एक भूमिगत सुरंग होती है। बिजली उत्पादन के बाद टरबाइन से निकलने वाले पानी को पावरहाउस से बाहर निकालकर नदी में पहुंचाने का काम इसी सुरंग के जरिए किया जाता है। पीपलकोटी परियोजना में इस टनल की लंबाई करीब ढाई किलोमीटर बताई गई है।
इसी परियोजना में पहले भी हुआ था हादसा
टीएचडीसी की इसी निर्माणाधीन परियोजना में पिछले साल 31 दिसंबर की रात सुरंग के अंदर दो लोको ट्रेनों की टक्कर हुई थी। उस हादसे में करीब 60 अधिकारी, कर्मचारी और मजदूर घायल हुए थे। घटना के समय सुरंग में 100 से अधिक लोग काम कर रहे थे।
फिलहाल चमोली में राहत और बचाव अभियान जारी है और प्रशासन की प्राथमिकता टनल में फंसे मजदूरों को जल्द से जल्द सुरक्षित बाहर निकालना है।
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