बसपा के राष्ट्रीय संयोजक आकाश आनंद करीब दो साल बाद उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर सक्रिय नजर आए हैं। हाथरस के सादाबाद में सोमवार को आयोजित जनसभा के जरिए उन्होंने यूपी में अपनी राजनीतिक वापसी का संकेत दिया। उनके भाषण में बसपा प्रमुख मायावती की नसीहतों का असर दिखाई दिया, वहीं युवाओं के बीच उनका प्रभाव भी नजर आया।
करीब दो साल बाद यूपी में सक्रिय हुए आकाश
लोकसभा चुनाव 2024 के बाद आकाश आनंद को उत्तर प्रदेश की राजनीति से दूर कर दिया गया था। सीतापुर में दिए गए एक विवादित भाषण के बाद मायावती ने उनसे प्रचार समेत कई जिम्मेदारियां वापस ले ली थीं। उन्हें पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और उत्तराधिकारी के पद से भी हटा दिया गया था।
हालांकि बाद में उनकी पार्टी में वापसी हुई, लेकिन यूपी और उत्तराखंड की राजनीति से उन्हें दूर रखा गया। इसके बाद उन्हें हरियाणा, दिल्ली और बिहार समेत कई राज्यों के चुनावों में पार्टी की जिम्मेदारी दी गई।
पुराने तेवर बरकरार, लेकिन बयानबाजी में दिखी परिपक्वता
सादाबाद की जनसभा में आकाश आनंद ने भाजपा, सपा और कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने युवाओं के मुद्दों को उठाते हुए विपक्षी दलों पर सवाल खड़े किए। हालांकि, इस दौरान उनके भाषण में पहले की तरह कोई बड़ा विवादित बयान सामने नहीं आया।
उनके भाषण में मायावती की राजनीतिक नसीहतों का असर भी दिखाई दिया। इससे संकेत मिला कि शुरुआती सियासी झटकों के बाद आकाश अपनी राजनीति में संयम और परिपक्वता लाने की कोशिश कर रहे हैं।
पारिवारिक विवाद का भी नहीं दिखा असर
हाल के दिनों में बसपा के भीतर हुई उठापटक का असर आकाश आनंद पर पड़ने की अटकलें थीं। मायावती ने उनके ससुर अशोक सिद्धार्थ को दोबारा पार्टी से बाहर कर दिया था। इसके बाद परिवार से जुड़ा विवाद भी सामने आया।
इसके बावजूद आकाश ने सादाबाद की जनसभा में पूरे आत्मविश्वास के साथ पार्टी का पक्ष रखा और राजनीतिक मुद्दों पर विपक्ष को घेरा।
2019 में शुरू हुआ था सियासी सफर
आकाश आनंद ने वर्ष 2019 में राजनीति में कदम रखा था। सहारनपुर के देवबंद में आयोजित रैली में मायावती ने उन्हें मंच पर जगह दी थी। इसके बाद उन्हें पार्टी का स्टार प्रचारक और राष्ट्रीय समन्वयक बनाया गया।
2023 में मायावती ने उन्हें अपना उत्तराधिकारी घोषित किया था। 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान विवादित भाषण के बाद उन्हें पद से हटा दिया गया। बाद में पार्टी में उनकी वापसी हुई, लेकिन यूपी की राजनीति से उन्हें दूर रखा गया।
2025 में मायावती ने आकाश आनंद और उनके ससुर अशोक सिद्धार्थ को पार्टी से बाहर कर दिया था। करीब चार महीने बाद दोनों की पार्टी में वापसी हुई। इसके बाद आकाश को कई राज्यों में चुनावी जिम्मेदारियां दी गईं।
अब करीब दो साल बाद यूपी में उनकी दोबारा सक्रियता को बसपा की आगामी रणनीति और आकाश आनंद के राजनीतिक भविष्य के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
satyamorcha.com Hindi News, latest and breaking news in Hindi