लखनऊ के अलीगंज स्थित कोचिंग और एनिमेशन सेंटर में हुए भीषण अग्निकांड में 15 लोगों की मौत के पीछे सुरक्षा मानकों की गंभीर अनदेखी सामने आई है। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि इमारत में बाहर निकलने का केवल एक ही रास्ता था और मुख्य गेट बायोमेट्रिक सिस्टम से संचालित ऑटोमैटिक गेट था, जो आग लगने के दौरान लॉक हो गया।
हादसे के समय इमारत में करीब 30 छात्र और स्टाफ मौजूद थे। आग लगने के कुछ ही मिनटों में पूरी बिल्डिंग धुएं से भर गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, बायोमेट्रिक सिस्टम ने काम करना बंद कर दिया, जिससे कई छात्र समय रहते बाहर नहीं निकल सके। इमरजेंसी एग्जिट का भी कोई वैकल्पिक रास्ता नहीं था।
जांच में यह भी सामने आया है कि छत पर जाने वाले रास्ते का दरवाजा बंद था। ऐसे में छात्र न तो नीचे निकल पाए और न ही छत पर पहुंचकर खुद को सुरक्षित कर सके। कई छात्रों ने खुद को बाथरूम और कमरों में बंद कर जान बचाने की कोशिश की, लेकिन जहरीले धुएं और दम घुटने से उनकी मौत हो गई।
प्रारंभिक जांच के मुताबिक, स्प्लिट एसी के कंप्रेसर में विस्फोट या शॉर्ट सर्किट के कारण आग लगी हो सकती है। हालांकि आग लगने के वास्तविक कारणों का पता फोरेंसिक और तकनीकी जांच रिपोर्ट आने के बाद ही चल सकेगा।
हादसे में 8 से 10 छात्र इंटरनेट और डीटीएच के तारों तथा पाइप के सहारे बाहर निकलने में सफल रहे, जबकि कुछ छात्रों ने दूसरी मंजिल से छलांग लगाकर जान बचाई। कई घायल छात्रों का इलाज केजीएमयू में चल रहा है।
जिस इमारत में हादसा हुआ, वह रामेश्वरम इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट (RITM) से जुड़े वीरेंद्र शुक्ला की बताई जा रही है। जांच में यह भी सामने आया है कि मूल रूप से आवासीय उपयोग के लिए स्वीकृत भवन को बाद में व्यावसायिक गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था।
फायर विभाग के अनुसार, सूचना मिलने के आठ मिनट के भीतर पहली दमकल गाड़ी मौके पर पहुंच गई थी। हालांकि घना धुआं और इमारत की संरचना राहत कार्य में बड़ी चुनौती साबित हुई। बचाव दल को पीछे की दीवार तोड़कर अंदर प्रवेश करना पड़ा।
प्रशासन ने मामले की उच्चस्तरीय जांच शुरू कर दी है और संबंधित अधिकारियों तथा भवन संचालकों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
satyamorcha.com Hindi News, latest and breaking news in Hindi