उत्तर प्रदेश में स्थायी DGP की नियुक्ति पर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद हलचल तेज हो गई है। करीब 4 साल से यूपी पुलिस को स्थायी DGP नहीं मिला है। हालांकि, राज्य सरकार नियम बना चुकी है, लेकिन अब तक लागू नहीं करा सकी है।
यूपी सरकार ने सितंबर, 2024 में स्थायी DGP की नियुक्ति के लिए ‘पुलिस महानिदेशक, उत्तर प्रदेश चयन एवं नियुक्ति नियमावली, 2024’ को मंजूरी दी थी। हालांकि, राज्य सरकार ने जो नियम बनाए थे, उसमें कई पेंच थे।
उन नियमों को कोर्ट में चैलेंज किया जा सकता है। यही वजह है कि सरकार ने अपनी ही नियमावली ठंडे बस्ते में डाल दी है। UPSC स्वायत्त संस्था है। इसे राज्य सरकार निर्देशित नहीं कर सकती। इसी तरह DGP के अखिल भारतीय सेवा (IPS) का अफसर होने के चलते ये मामला केंद्र सरकार के काम में हस्तक्षेप के तौर पर भी देखा जा रहा।
नियमावली के अहम पहलू
चयन समिति: हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में 6 सदस्यीय समिति बनेगी। इसमें मुख्य सचिव, UPSC का एक प्रतिनिधि, UPPSC के अध्यक्ष या उनका प्रतिनिधि, अपर मुख्य सचिव (गृह) और एक पूर्व DGP शामिल होंगे।
कार्यकाल: DGP के रूप में नियुक्त अफसर का कार्यकाल कम से कम 2 साल का होगा।
योग्यता: अफसर के रिटायरमेंट की तारीख कम से कम 6 महीने बाद की हो।
प्रक्रिया: DGP की नियुक्ति के लिए UPSC को पैनल भेजने की जरूरत नहीं। राज्य सरकार चयन समिति की सिफारिश पर नियुक्ति करेगी। 2006 के प्रकाश सिंह केस में सुप्रीम कोर्ट ने इस प्रक्रिया को निर्देशों के अनुरूप बताया है। हटाना: कार्य में विफलता या अन्य कारणों से राज्य सरकार की नियमावली के तहत DGP को पद से हटाया जा सकता है।
वरिष्ठता में सबसे ऊपर कौन?
IPS अफसरों के वरिष्ठता क्रम में सबसे ऊपर रेणुका मिश्रा का नाम है। उनके अलावा 2 अन्य अफसर भी कार्यवाहक DGP राजीव कृष्ण से सीनियर हैं। इनमें 1991 बैच के IPS आलोक शर्मा और पीयूष आनंद का नाम शामिल है। आलोक शर्मा इसी साल जून में रिटायर हो जाएंगे।
राजीव कृष्ण कब बन सकते हैं स्थायी DGP
मौजूदा कार्यवाहक DGP राजीव कृष्ण की नियुक्ति जून, 2025 में हुई थी। योगी सरकार ने करीब 7 सीनियर अफसरों को पीछे करके उन्हें DGP बनाया था। अगर UPSC के जरिए नियुक्ति होती, तो राजीव DGP नहीं बन पाते।
दरअसल, UPSC 3 सबसे सीनियर अफसरों के नाम का पैनल राज्य सरकार को भेजती है। उन्हीं में से एक को DGP चुना जाता है। हालांकि, अब राजीव से सीनियर 4 अफसर रिटायर हो चुके हैं। मौजूदा वक्त में भी वह वरिष्ठता में चौथे नंबर पर हैं।
जून में आलोक शर्मा के रिटायर होने के बाद राजीव कृष्ण तीसरे नंबर पर होंगे। उनसे सीनियर दो अन्य अफसर रेणुका मिश्रा और पीयूष आनंद CM योगी की पसंद के नहीं बताए जाते। रेणुका मिश्रा को तो फरवरी, 2024 में भर्ती बोर्ड से हटाए जाने के बाद अब-तक पोस्टिंग तक नहीं दी गई है। उन्होंने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) के लिए अप्लाई है। हालांकि, अभी तक इसकी मंजूरी नहीं मिली है।
यूपी में 4 साल से स्थायी DGP नहीं
यूपी पुलिस के आखिरी स्थायी DGP मुकुल गोयल थे। 11 मई, 2022 को उन्हें पद से हटाकर देवेंद्र सिंह चौहान को कार्यवाहक DGP बनाया गया था। चौहान का कार्यकाल 31 मार्च, 2023 तक रहा। उनके बाद राजकुमार विश्वकर्मा और फिर विजय कुमार को कार्यवाहक DGP बनाया गया।
विजय कुमार 31 जनवरी, 2024 को रिटायर हुए तो प्रशांत कुमार कार्यवाहक DGP बने। मई, 2025 में उनके रिटायरमेंट के बाद 1991 बैच के IPS राजीव कृष्ण को कार्यवाहक DGP बनाया गया।
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