रामजन्मभूमि परिसर में दिव्य-भव्य मंदिर तेजी से आकार ले रहा है। यहां मंदिर समेत दस परियोजनाओं पर एक साथ काम चल रहा है। राम मंदिर निर्माण का 80 फीसदी काम पूरा हो चुका है। वहीं मंदिर को अद्भुत स्वरूप देने में अब तक करीब एक हजार करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। 3500 मजदूर व कारीगर दिन-रात राम मंदिर को आकार देने में जुटे हुए हैं। राम मंदिर का बजट काशी विश्वनाथ धाम व महाकाल कॉरीडोर से भी आगे निकल चुका है।
161 फीट ऊंचे तीन मंजिला राममंदिर का भूतल लगभग तैयार है, अब केवल फिनिशिंग का काम चल रहा है। जबकि प्रथम तल करीब 60 फीसदी तैयार हो चुका है। ट्रस्ट सूत्रों के मुताबिक इन योजनाओं के निर्माण में अब तक करीब एक हजार करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं। मंदिर सहित अन्य प्रकल्पों के निर्माण में कुल 1800 करोड़ खर्च होने का अनुमान है। जबकि काशी विश्वनाथ धाम के सुंदरीकरण में करीब नौ सौ करोड़ व महाकाल कॉरीडोर को विकसित करने में करीब 850 करोड़ खर्च हुए थे। राम मंदिर भव्यता व तकनीक के मामले में भी दुनिया के चुनिंदा मंदिरों में से एक होगा।
ट्रस्ट सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इसमें अकेले मंदिर निर्माण की ही लागत 575 करोड़ आंकी गई है। इसके अलावा मंदिर परिसर में तीर्थयात्री सुविधा केंद्र, पब्लिक यूटिलिटी, परकोटा, रिटेनिंग वॉल, सीता कूप, कुबेर टीला, शेषावतार मंदिर का सुंदरीकरण, बिजली व पानी का प्लांट, सड़कों के निर्माण का काम चल रहा है।
नए मंदिर में प्राण प्रतिष्ठित होने वाली रामलला की अचल मूर्ति का भी निर्माण हो रहा है। कर्नाटक व राजस्थान के मूर्तिकार तीन अचल मूर्ति बना रहे हैं, जो लगभग बनकर तैयार हो चुकी है। जिसमें रामलला की बाल सुलभ कोमलता झलकेगी उसे मंदिर में स्थापित किया जाएगा। 17 जनवरी को रामलला की भव्य शोभायात्रा अयोध्या धाम में निकाली जाएगी।
स्वर्ण जड़ित किए जा रहे मंदिर के दरवाजे
राम मंदिर में लगने वाले दरवाजों को स्वर्ण जड़ित करने का काम चल रहा है। इसकी जिम्मेदारी दिल्ली की एक ज्वेलर्स फर्म को दी गई है। दरवाजों पर पहले 20 गेज के तांबे का चद्दर लगाया जा रहा है, जिसकी केमिकल और तेजाब से सफाई की जाएगी। इसके बाद इस पर पांच लेयर सोने का वर्क लगाया जाएगा और इस कार्य को पांच जनवरी तक पूरा करने का समय दिया गया है। राममंदिर के सिंहासन व पांचों गुंबद पर भी सोने की परत चढ़ाई जाएगी।
योजना – प्रगति
राम मंदिर निर्माण-80 फीसदी
तीर्थयात्री सुविधा केंद्र-70 फीसदी
कुबेर टीला सुंदरीकरण-80 फीसदी
सीता कूप सुंदरीकरण-90 फीसदी
सड़कों का निर्माण-90 फीसदी
परकोटा-70 फीसदी
रिटेनिंग वॉल-70 फीसदी
पावर प्लांट-95 फीसदी
मूर्ति निर्माण-95 फीसदी
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